कम्प्यूटर का विकास
सर्वप्रथम मनुष्य द्वारा गणना के लिए अबेकस नामक यंत्र का प्रयोग किया गया। इस यंत्र का निर्माण चीन में हुआ , इस यंत्र में गोलियों का प्रयोग होता था। इन गोलियों की सहायता से गणना का कार्य आसान हो गया।
इसके बाद अनेक वैज्ञानिको द्वारा समय समय पर गणना यंत्रो का इस्तेमाल किया गया जिसमे विलियम आर्थर का स्लाइड रूलर भी था। इस यंत्र से गुना भाग के अलावा भी गणनाये संपन्न होती थी। इसका प्रचलन 1870 में था , तत्पश्चात पॉकेट कैलकुलेटर के प्रयोग से इसका प्रयोग होना बंद हो गया।
- 1642 में युवा वैज्ञानिक ब्लेज़ पास्कल ने गियर्स की सहायता से कार्य करने वाला प्रथम यांत्रिक कैलकुलेटर बनाया।
- इस यंत्री ककलकुलेटर का नाम पास्कलीन दिया गया।
- 1833 में चार्ल्स बैबेज ने स्वचालित कैलकुलेटर की परिकल्पना की। उन्होंने इसके लिए 40 वर्ष से अधिक म्हणत की पर वे सफल नहीं हो सके।
- चार्ल्स बैबेज को आधुनिक कम्प्यूटर का जन्मदाता कहा जाता है।
- सर्वप्रथम कम्प्यूटर के लिए प्रोग्राम लिखने का श्रेय उनकी शिष्या लेडी एडा अगस्ता को जाता है।
- 50 वर्ष पश्चात् बैवेज की परिकल्पना को अमेरिकी वैज्ञानिक हर्मन हॉलेरिथ ने साकार किया।
- इन्होने गणना के लिए टेबुलटिंग मशीन बनाई जो पंचकार्डो की सहायता से सारा काम स्वचालित रूप से करती थी।
- सन 1937 में होवार्ड एकिन ने पहला यांत्रिक कम्प्यूटर mark-1 बनाया।
- चिप के विकास हो जाने के बाद वैज्ञानिक चिप के साइज को छोटा से छोटा बनाने के काम में लग गए। इसी क्रम में इंटेल 4004 नामक चिप बनाई।
- इसका विकास 8086 तथा 8080 के आधार पर किया गया।
- गणना मशीन के क्षेत्र में क्रांति विश्व के पहले कम्प्यूटर ENIAC का अविष्कार होने से हुई, इसमें स्विच के रूप में इलेक्ट्रिक वाल्व या वैक्यूम ट्यूब का उपयोग किया गया।
- कम्प्यूटर के विकास में सर्वाधिक योगदान देने वाला व्यक्ति जान वान न्यूमैन है , इन्होने 1951 में कम्प्यूटर क्रांति को सही दिशा दी।
- उन्होंने EDVAC का अविष्कार किया तथा उन्होंने संचालित प्रोग्राम का प्रयोग किया। कम्प्यूटर के क्षेत्र में BINARY SYSTEM के प्रयोग का श्रेय भी उन्ही को जाता है।
कम्प्यूटर के विभिन्न भाग
CPU- यह सेन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट का छोटा रूप है इसे कम्प्यूटर का मस्तिष्क भी कहा जाता है।
RAM- यह रैंडम एक्सेस मेमोरी कहलाता है। सामान्य भाषा में इसे कम्प्यूटर की याददाश्त कहा जाता है। रैम की गणना मेगा बाइट्स में की जाती है।
ROM- यह रिड ओनली मेमोरी का छोटा रूप है। यह हार्डवेयर का वह भाग है, जिसमे सभी सूचनाएं स्थाई रूप से इकठ्ठा रहती है और जो कम्प्यूटर को प्रोग्राम संचालित करने का निर्देश देती है।
MOTHER BOARD-यह सर्किट बोर्ड होता है, जिसमे कम्प्यूटर के प्रत्येक प्लग लगाए जाते है।
HARD DISK- इसमें कम्प्यूटर के लिए प्रोग्राम को स्टोर करने का कार्य होता है।
KEY BOARD- कम्प्यूटर की लेखन प्रणाली के लिए उपयोग में लाया जाने वाला उपकरण की बोर्ड कहलाता है। सामान्यतः 101 बटन के बोर्ड को अच्छा माना जाता है।
MOUSE- इसकी सहायता से स्क्रीन पर कम्प्यूटर के विभिन्न प्रोग्रामो को ऐसे माध्यम से संचालित किया जाता है।
SOUND CARD- यह जरुरी बातो और जानकारियों को सुनने के साथ साथ मल्टीमीडिया के बढ़ते प्रयोग के लिए आवश्यक है।
CPU- यह सेन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट का छोटा रूप है इसे कम्प्यूटर का मस्तिष्क भी कहा जाता है।
RAM- यह रैंडम एक्सेस मेमोरी कहलाता है। सामान्य भाषा में इसे कम्प्यूटर की याददाश्त कहा जाता है। रैम की गणना मेगा बाइट्स में की जाती है।
ROM- यह रिड ओनली मेमोरी का छोटा रूप है। यह हार्डवेयर का वह भाग है, जिसमे सभी सूचनाएं स्थाई रूप से इकठ्ठा रहती है और जो कम्प्यूटर को प्रोग्राम संचालित करने का निर्देश देती है।
MOTHER BOARD-यह सर्किट बोर्ड होता है, जिसमे कम्प्यूटर के प्रत्येक प्लग लगाए जाते है।
HARD DISK- इसमें कम्प्यूटर के लिए प्रोग्राम को स्टोर करने का कार्य होता है।
KEY BOARD- कम्प्यूटर की लेखन प्रणाली के लिए उपयोग में लाया जाने वाला उपकरण की बोर्ड कहलाता है। सामान्यतः 101 बटन के बोर्ड को अच्छा माना जाता है।
MOUSE- इसकी सहायता से स्क्रीन पर कम्प्यूटर के विभिन्न प्रोग्रामो को ऐसे माध्यम से संचालित किया जाता है।
SOUND CARD- यह जरुरी बातो और जानकारियों को सुनने के साथ साथ मल्टीमीडिया के बढ़ते प्रयोग के लिए आवश्यक है।
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