पाठको! उम्मीद है आपको हमारी पिछले पोस्ट अच्छे लगे होंगे साथ ही ज्ञानवर्धक भी। इसी क्रम में कम्प्यूटर से सम्बंधित जानकारी के साथ फिर एक पोस्ट आपके लिए प्रस्तुत है। धन्यवाद!
कम्प्यूटर की पीढिया
प्रथम पीढ़ी -
प्रथम पीढ़ी का समय सन 1942 से 1955 तक रहा। इस पीढ़ी में मुख्यतः निर्वात पम्पो (VACUUM TUBES ) का उपयोग किया गया। इन निर्वात पम्पो में फिलमेंटो की सहायता से निर्देशों को लिखा जाता था। ये कम्प्यूटर अपने समय के सबसे तेज चलने वाले कम्प्यूटर थे। इन कम्पूटरो का बिजली उपयोग सबसे अधिक था। ENIAC इस पीढ़ी का प्रथम जनरल (सामान्य) कम्प्यूटर था।
द्वितीय पीढ़ी -
इस पीढ़ी की समय सीमा 1955 से 1965 तक रही , सन 1947 से ट्रांजिस्टर की खोज हुई। इनका निर्माण जर्मेनियम की सहायता से किया गया। इनकी गति प्रथम पीढ़ी कम्पूटरो की तुलना में 10 गुना अधिक थी। इनका आकार भी निर्वात पम्पो की तुलना में कम था। इस पीढ़ी में प्रोग्राम लिखने के लिए उच्च स्तरीय भाषा जैसे - FORTRAN , COBOL, ALGOL, और SNOBOL का उपयोग किया गया।
तृतीय पीढ़ी -
इस पीढ़ी की समय सीमा 1964 से 1975 तक रही , 1958 में प्रथम INTEGRETED CIRCUITS (IC'S) की खोज होने से इसका प्रयोग तृतीय पीढ़ी के कम्प्यूटरो में होने लगा। IC एक प्रकार से कई सरे इलेक्ट्रॉनिक सर्किट का समूह था जिसे चिप नाम दिया गया। इस पीढ़ी के कम्प्यूटरो की स्पीड 1 मिलियन इंस्ट्रक्शन पर सेकेण्ड थी। ये एक प्रकार से सामान्य कम्प्यूटर थे जो की वैज्ञानिक और व्यापारिक कार्यो में कुशल थे।
चतुर्थ पीढ़ी -
इसकी समय सीमा 1975 से 1989 तक रही थी , इसमें माइक्रोप्रोसेसर चिप का प्रयोग किया गया। मेमोरी में सेमीकंडक्टर के स्थान पर मैग्नैटिक कोर्स का उपयोग किया जाने लगा जैसे - FLOPPY DISK, CR ROM, ETC . इस समय उच्च गति के कम्प्यूटरो का विकास हुआ जो की कई सारे कम्प्यूटरो को एक साथ जोड़ने तथा अपने डाटा को बदलने , आदान प्रदान में सहायक थे। इस पीढ़ी में APPLE, DCM आदि कम्प्यूटर आये इन्हे पर्सनल कम्प्यूटर नाम दिया गया क्योकि इन्हे कोई भी व्यक्ति आसानी से उपयोग में ले सकता था।
पांचवी पीढ़ी -
इस पीढ़ी की समय सीमा 1989 से आज तक है , इनका आकर चतुर्थ पीढ़ी के कम्प्यूटरो से काफी छोटा था। स्पीड भी काफी तेज थी। आजकल कम्प्यूटरो में सिलिकॉन टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया जा रहा है भविष्य में इसके स्थान पर गैलियम आर्सेनाइड का उपयोग भी संभव है।
कम्प्यूटर के विभिन्न भाग
PRINTER- इसकी मदद से कम्प्यूटर पर अंकित आंकड़ों को कागज पर मुद्रित किया जाता है। डॉट मेट्रिक्स, इंक जेट, बबल जेट और लेजर जेट प्रमुख प्रिंटर है।
FLOPPY DISK DRIVE- यह सूचनाओं को सुरक्षित करने या सूचनाओं का एक कम्प्यूटर से दूसरे कम्प्यूटर में आदान प्रदान करने में प्रयुक्त होता है।
CD-ROM यह छोटे से आकर में होते हुए भी बहुत बड़ी मात्रा में आंकड़ों तथा चित्रों को आवाज के साथ संगृहीत करने में सक्षम होता है।
MONITOR- इस पर कम्प्यूटर में निहित जानकारियों को देखा जा सकता है। अच्छे रंगीन मॉनिटर में 256 रंग आते है। मॉनिटर में डॉट पिच का उपयोग होता है। डॉट पिच में जितने कम नंबर होते है , स्क्रीन पर आने वाली छवि उतनी ही साफ और गहराई लिए होती है।
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