राजस्थान में जनजाति आंदोलन
भील आंदोलन :
- मेवाड़ राज्य की रक्षा में भीलो ने सदैव महत्पूर्ण भूमिका निभाई इसी कारण मेवाड़ के राज्य चिन्ह में राजपूत के साथ भीलो का चित्र भी अंकित था।
- भीलो में जाग्रति की विचारधारा फ़ैलाने वालो में सर्वाधिक महत्वपूर्ण नाम गोविन्द गिरी था।
- गुरु गोविन्द का जन्म 1858 में डूंगरपुर राज्य के बंसिया गांव में एक बंजारे के घर में हुआ था।
- आदि वासी लोगो में जाग्रति पैदा करने के लिए गुरु गोविन्द ने 1883 में सम्प सभा की स्थापना की तथा मेवाड़ , डूंगरपुर , गुजरात , विजयनगर और मालवा आदि क्षेत्रों के भीलो और गरासिओ को इस संस्था के माध्यम से संगठित किया
- गोविन्द गिरी ने आदि वासिओ में जाग्रति के लिए भगत आंदोलन चलाया।
- गोविन्द गिरी ने सम्प सभा का प्रथम अधिवेशन 1903 में मानगढ़ की पहाड़ी (बांसवाड़ा) पर किया।
- प्रत्येक वर्ष मानगढ़ की पहाड़ी पर सम्प सभा का अधिवेशन किया जाने लगा।
- गुरु गोविन्द ने अपना शेष जीवन गुजरात के कम्बोई नमक स्थान पर बिताया।
- राजस्थान के आदि वासिओ में गोविन्द गिरी के पश्चात् मोती लाल तेजावत का स्थान सबसे महत्त्व पूर्ण है।
- मोतीलाल तेजावत का जन्म उदयपुर (मेवाड़) के फलासिया क्षेत्र के ओसवाल परिवार में हुआ।
- युवा अवस्था में मोतीलाल जी झाड़ोल ठिकाने के कामदार बन गए।
- आदिवासीओ पर होने वाले अत्याचार को देख कर तेजावत ने कामदार की नौकरी छोड़ दी।
- मोतीलाल जी ने सिरोही और उदयपुर के आदि वासिओ में जाग्रति लाने का काम किया।
- तेजावत ने लाल बाग , बैठ बैगार आदि के विरुद्ध मातृकुण्डिया (चित्तौरगढ़) से एकी आंदोलन चलाया ये आंदोलन भोमट क्षेत्र में चलाया , इसीलिए इसे भोमट भील आंदोलन भी कहते है।
- मेवाड़ सेना द्वारा सम्मलेन को घेर कर गोलिया चलने पर 1200 भील मरे गए तथा हजारो लोग घायल हो गए , भील नेता तेजावत भी स्वयं घायल हो गए।
- नीमड़ा हत्याकांण्ड दूसरा जलिया वाला बाग हत्याकांड था।
- मोतीलाल तेजावत 8 वर्ष तक भूमिगत रहने के बाद 1929 में गाँधी जी की सलाह पर आत्मसमर्पण किया।
मीणों का आंदोलन :
- 1924 मे भारत सरकार ने क्रिमिनल ट्राइबस एक्ट लागू किया।
- जयपुर राज्य मे उक्त कानून की छाया मे मीणो को जयराम पेशा मानकर हर मीणा परिवार के बालिक स्त्री पुरुष ही नहीं ,12 वर्ष से बड़े बच्चों का भी पास के पुलिस ठाणे में नाम दर्ज करवाना और दैनिक हाजरी दे जरूरी कर दिया।
- सरकार की इस कार्यवाही के विरुद्ध छोटराम ,महादेवराम पाबड़ी ,लक्ष्मीनारायण झारवाल ,जवाहरराम ,मानोलाल आदि ने मीणा जाति सुधार कमेटी का गठन किया।
- अप्रैल 1994 मे जैन मुनि मगन सागरजी की अध्यक्षता मे नीम का थाना मे मीणों का एक बड़ा सम्मेलन हुआ जिसमे जयपुर राज्य मीणा सुधार समिति नामक सस्था की स्थापना की।
- इस समिति के अध्यक्ष श्री बंशीधर शर्मा ,मंत्री श्री राजेंद्र कुमार अजेय और सयुंक्त मंत्री श्री लक्ष्मी नारायण झरवाल बनाये गए।
- मीणा समाज मे व्याप्त बुराइयों को दूर करना ,जयराम पेशा और दादरजी जैसे कानूनों को रद्द करवाने के लिए आंदोलन करना तथा चौकीदार प्रथा को समाप्त करना समिति ने तीन सूत्री कार्यक्रम रखा।
- नीम का थाना सम्मेलन मीणा जाती के इतिहास में मील का पत्थर सिद्ध हुआ।
- अप्रैल 1945 में श्री माधोपुर में हुए समिति की बैठक में राज्यव्यापी आंदोलन करने का निर्णय लिया।
- समिति ने लक्ष्मीनारायण झारवाल को आंदोलन का सयोंजक नियुक्त किया।
- सरकार ने तत्काल ही लक्ष्मीनारायण झारवाल को भारत सुरक्षा कानून के अन्तर्गत गिरफ़्तार कर उन्हे कैद में रखकर भारी यातनाएँ दी।
- पिछड़ी जातियों के मसीहा ठक्कर भापा ने जयपुर के तात्कालीन प्रधानमंत्री सर मिर्जा इस्माइल को पत्र लिखकर जरायम पेशा कानून आदि को रद्द करने की सलाह दी।
- 28 अक्टूबर 1946 को मीणो ने राजयभर में मुक्ति दिवस बनाया। उसी दिन बागावास में मीणो का सम्मेलन भी आयोजित किया गया।
- बागावास के मीणा सम्मेलन श्री हीरालाल शास्त्री और श्री टीकाराम पालीवाल आदि ने भाग लिया।
महत्वपुर्ण तथ्य :
- बटलर समिति की स्थापना 26 दिसंबर 1927 में हुई।
- अलवर के पुरजन विहार पर तिंरगा फहरा अंग्रेजो का विरोध प्रकट किया।
- 26 जनवरी 1930 को चूरू के धर्मस्तूप के शिखर पर चंदनमल बहड़ ,स्वामी गोपालदास ने तिंरगा झण्डा फहराया।
- निमेज़ (आरा )हत्याकांड बिहार के एक ग्राम के धनाढ्य जैन महंत की हत्या से संबंधित है। जिसमे मोतीचंद को मृत्यु दंड तथा अर्जुन सेठी को जेल की सजा हुई।
- होर्डिग्स बमकांड :1912 में दिल्ली में जोरावर सिंह बारहठ ने चांदनी चौक में लॉर्ड होर्डिग्ज पर बम फेका। इस प्रकरण में श्री अर्जुनलाल सेठी को वेलूर जेल बेज दिया गया।
- मेयो कॉलेज बम केस ज्वालाप्रसाद तथा फतेचंद से संबंधित है।
- डोगरा कांड ज्वालाप्रसाद शर्मा से संबंधित है। इस कांड मे पुलिस अधिकारी श्री पी एन डोगरा के बजाय इस्पेक्टर श्री सलालुद्दीन मरे गए।
- अजमेर रेलवे वर्कशॉप हड़ताल का नेतृत्व ज्वालाप्रसाद शर्मा ने किया।
- पूनावाड़ा कांड तथा रास्तापाल कांड डुंगरपुर रियासत से सम्बंधित है।
- पूनावाड़ा कांड पाठशाला को ध्वस्त करने से संबंधित है। जिसका विरोध श्री शिवराम भील ने किया।
- रास्तापाल कांड (डूंगरपुर )के शहीद श्री नानाभाई खांट तथा कालीबाई को गोलियों से छलनी क़र दिया गया।
- विलियम बैटिंग ने अजमेर में ए जी जी का कार्यलय (1832 )में स्थापित किया। मि लाकेट प्रथम ए जी जी थे।
- प्रयाण सभाएं - डूंगरपुर रियासत शासन के विरोध से संबंधित है। यह भूदान आंदोलन के समान थी।
- करौली में मदन सिंह ने सुअरो को मारने की आज़ादी और हिंदी राजभाषा चलाने के लिए आन्दोलन चलाया।
- 1 जनवरी 1903 को आयोजित लार्ड कर्जन के दरबार में जाने से महाराणा फ़तेसिंह को रोकने हेतु उनके दरबारी कवि केसरीसिंह बारहठ ने "चेतावनी का चंगूटिया "(13 सोरठे )लिखे।
- 1911 के जार्ज पंचम के दरबार (दिल्ली) में भी फतेहसिंह हाजिर नहीं हुआ।
- अजमेर दरबार (1870 ) लार्ड मेयो के समय, तथा दिल्ली दरबार (1903 ) लार्ड कर्जन के समय आयोजित हुआ।
- प्रिंस ऑफ़ वेल्स (प्रिंस अल्बर्ट )1875 में भारत आया। जयपुर अल्बर्ट हाल की नींव उसी समय रखी गयी थी।
- तासिमो कांड धौलपुर जिले में हुआ,यह तिरंगे झंडे फहराने की खातिर छतरसिंह तथा पंचमसिंह ने प्राण त्यागे।
- स्वामी दयांनद सरस्वती,सत्यार्थ प्रकाश के लेखक तथा आर्य समाज के संस्थापक थे। जोधपुर में एक मुस्लिम वेश्या द्वारा विष देने के कारण अजमेर में उनकी मौत हुई
- लंदन में हुए प्रथम ,गोलमेज सम्मेलन में जयसिंह (अलवर नरेश ), महाराजा गंगासिंह (बीकानेर),उदयभान (धौलपुर) ने भाग लिया। कांग्रेस ने इसका विरोध किया।
- बाबू मुक्ताप्रसाद तथा वैध मघाराम बीकानेर राज्य के स्वतंत्रा सेनानी थे।
- पं हरिनारायण शर्मा (अलवर),जमनाप्रसाद वर्मा (धौलपुर)के क्रान्तिकारी थे।
- बाबा लक्ष्मण दास ,मोगीलाल पंड्या बागड़ से सम्बंधित थे।
- अलवर तथा जयपुर प्रजामण्डल ने भारत छोड़ो आंदोलन में भाग नहीं लिया।
- अलवर नरेश प्रथम राजा थे ,जिन्हे अध्यन्न हेतु मेयो कॉलेज भेजा गया।
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