राजस्थान लोकदेवता




राजस्थान लोकदेवता 
प्रमुख लोकदेवता -
 1 .  रामदेवजी इनका जन्म शिव तहसील बाड़मेर में हुआ था।  ये जाति से राजपूत थे।  इनके गुरु का नाम बालीनाथ था।  इनके पिता का नाम अजमल, माता का नाम मेणादे था तथा इनकी पत्नी का नाम नैतलदे था जो अमरकोट के सोढ़ा राजपूत दलसिंह की पुत्री थी।  इनका रात्रि जागरण जम्भा कहलाता है।  देवजी के पुजारी रिखिया कहलाते है।  रामदेवजी का झंडा नेजा कहलाता है।  इन्होने डालीबाई मेघवाल को अपनी धर्म बहन बनाया था।  हिन्दू इन्हे कृष्ण तथा मुस्लिम इन्हे रामसापीर मानते है।  इन्होने कामङिया पंथ चलाया। इनका मेला साम्प्रदायिक सद्भावना के लिए प्रसिद्द है।  इनके मेले पर कामद जाती की स्त्रिया तेरह ताली नृत्य तथा भक्त ब्यावाले करते है।  एकमात्र लोकदेवता जो कवि थे। इनके उपदेश 24 वाणियो में सुरक्षित है जिन्हे बाबारी पर्ची कहते है।  सबसे लम्बा गीत (48 मिनटरामदेवजी का ही है। 


2 .  पाबूजी - इनका जन्म फलोदी तहसील के कोलुमण्ड गांव में हुआ था।  इनकी घोड़ी का नाम केसर कलमी था।  मारवाड़ में   लाने का श्रेय इन्हे ही है।  पाबूजी का मुख्य तीर्थ स्थल कोलू (फलोदी ) ही है।  पाबूजी को लक्ष्मण का अवतार माना गया है।  इन्हे प्लेग रक्षक देवता भी कहा गया है।  पाबूजी की फड़ नायक जाती के भोपो द्वारा रावणहथ्था वाद्य यंत्र के साथ बाची जाती है।  

3.  गोगाजी - इनका जन्म चूरू के ददरेवा गांव में हुआ , ये जाति से राजपूत तथा इनका गोत्र चौहान था।  
इनके गुरु गोरखनाथ थे जो भृतहरि  के गुरु भी थे।  इनका विवाह कोमलदे के साथ हुआ था।  गोगाजी को सांपो का देवता या जाहरपीर कहते है।  इन्हे जाहरपीर की उपाधि महमूद गजनबी ने दी थी , इन्होने गजनबी के साथ युद्ध लड़ा था। इनकी सवारी नीली घोड़ी थी।  इन्हे गायो की मुक्ति का दाता  कहते है।  गोगामेड़ी का निर्माण फिरोजशाह तुगलक ने बनवाया जिसकी आकृति मकबरानुमा है।  इनके मुस्लिम पुजारी चायल कहलाते है।  


4 .  तेजाजी - इनका जन्म नागौर जिले के खड़नाल गांव में हुआ था , इनके पिता ताहड जी तथा माता रामकुंवरी थी।  इनका विवाह अजमेर की राजकुमारी पेमल के साथ हुआ।  इनकी घोड़ी का नाम लीलण था।  लाछा गुजरी की गया को मेरो से छुड़वाते होते प्राण त्यागे , तेजाजी के भोपो को घोड़ला कहा जाता है।  इनका मुख्य स्थल परबतसर में स्थित है यहाँ प्रतिवर्ष पशु मेला लगता है।  इन्हे सांपो का देवता भी माना  गया है।  


5 . कल्लाजी - इनका जन्म मेड़ता नागौर में हुआ था।  इनके पिता का नाम आशसिंह , चाचा का नाम जयमल था।  इनके गुरु का नाम भैरवनाथ था।  इन्हे असाध्य रोगो का इलाज करने वाला माना  जाता है।  सामलिया  (डूंगरपुर ) में इनके काले पत्थर की मूर्ति है।  1567 में जब अकबर में मेवाड़ पर युद्ध किया तो कल्लाजी ने  अणि जयमल को कंधे पर बैठाकर अकबर की सेना के खिलाफ युद्ध किया। इन्हे चार हाथो का देवता भी कहा गया है।  इनकी छतरी चित्तौडग़ढ़ में स्थित है।  इन्हे शेषनाग का अवतार माना  गया है।  

6 . देव नारायणजी - इनका जन्म भीलवाड़ा की आसींद तहसील में हुआ , पिता सवाईभोज , पत्नी का नाम पीपलदे था।  इनके बचपन का नाम उदय सिंह थ। आसीन्द में इनका प्रमुख मंदिर स्थित है , इनका मंदिर देवरा कहलाता है।  ये गुर्जरो के लोकदेवता के रूप में विख्यात है।  गुर्जर समाज इन्हे विष्णु का अवतार मानता है।  इनके घोड़े का नाम लीलाधर था।  सबसे लम्बी और पुरानी फड़ इनकी ही है , इनकी फड़  का वाचन जंतर वाद्य यंत्र से किया जाता है।  देव नारायण जी के स्थान पर ईट  की पूजा होती है।  1992 में देव नारायण जी फड़ पर डाक टिकिट जारी किया गया।  

7 . देवबाबा - इनका मंदिर नगला जहाज भरतपुर में स्थित है।  धार्मिक विचारो के साथ साथ इन्हे पशु चिकित्सक का ज्ञान भी हो गया ये भी गुर्जरो के लोकदेवता कहलाते है।  मेवात में इन्हे ग्वालो का देवता भी कहते है।  नगला जहाज में लालदासजी की प्रमुख पीठ भी स्थित है।  

8 .  तल्लीनाथ - इनका वास्तविक नाम गंगदेव राठौर था , इनके गुरु का नाम जालंधरनाथ था। इनकी जालोर और पाली जिलों में विशेष मान्यता है।  राजस्थान के एकमात्र देवता जिन्होंने वृक्ष काटने पर रोक लगाई।  

9 . मल्लिनाथ - इनका जन्म बाड़मेर जिले के मालनी क्षेत्र में हुआ था।  इन्ही के नाम से मालाणी नस्ल का घोडा प्रसिद्द है इनका मुख्य मंदिर बाड़मेर जिले में बालोतरा के निकट तिलवाड़ा गांव में स्थित है।  

10 . डूंगरजी (बलजी ) और  जवाहरजी (भूरजी )  - शेखावाटी क्षेत्र के चाचा भतीजा नाम से प्रसिद्द।  इनका कार्य लूटपाट करना था।  ये धन लूटकर गरीबो में वितरण करते थे।  गरीबो के देवता कहलाये।  1857 की क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।  

11 .  हड़बूजी - इनका जन्म नागौर में हुआ , ये मारवाड़ के पांच पीरो में से एक थे।  इनके गुरु का नाम बालीनाथ था।  ये जोधपुर के शासक रावजोधा के समकालीन थे। ये रामदेवजी के मोसेरे भाई थे।  ये शकुन शास्त्र के ज्ञाता थे।  ये अपंग गायो के लिए बैलगाड़ी से चारा लाते थे।  

12 . भूरिया बाबा / गोतमेश्वर - इनका मंदिर प्रतापगढ़, पाली तथा सिरोही में है।  ये भीलो के देवता भी है।  ये मीणा जाति  के इष्ट देव है।  मीणा जाति के लोग इनकी झूठी कसम नहीं खाते।  ये गोडवाड़ के मीणाओ के लोक देवता के रूप में प्रसिद्द है।  

13 . बिग्गाजी - इनका जन्म बीकानेर के रोही  गांव में हुआ , मुस्लिम लुटेरों से गाय छुड़ाते हुये  अपने प्राणो का बलिदान दिया।  ये गायो के मुक्तिदाता कहलाते है।  ये जाखड़ जाति के कुल देवता है।  इनका मंदिर रोही  गांव में है।  

14 . झुंझारजी - इनका जन्म इमलोह गांव सीकर में हुआ था।  इनकी जाति राजपूत थी।  इनका स्थल खेजड़ी वृक्ष के नीचे होता है।  







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