पाठको ! उम्मीद है आपको सभी हिंदी कहानिया काफी पसंद आती है ये कहानिया प्रेरणादयक तथा उत्साहवर्धक होती है अतः आपको समय समय पर ये कहानिया उपलब्ध कराना हमारे लिए महत्वपूर्व होता है अतः इसी क्रम में इस पोस्ट में आपको दो हिंदी कहानिया पढ़ने को मिलेगी , आशा करते है आपको ये हिंदी कहानिया अच्छी लगेगी। धन्यवाद
सही दिशा का ज्ञान
एक बार की बात है , एक गांव में एक पहलवान रहता था उसका नाम भीमा था उसे लगता था की वह बहुत अधिक समझदार है तथा चालाक भी। गांव में सभी जानते थे की वह हर बात में ज्यादा चालाकी दिखाता है परन्तु उसकी यही चालाकी उसकी बेवकूफी बन जाती है। एक दिन उसे दूसरे शहर में किसी काम से जाना पड़ा उसने अपनी पत्नी से सामान बांधने को कहा उसकी पत्नी ने सामान बांध दिया। दूसरे शहर में पहुंच कर अपना काम ख़तम करके उसने सोचा की पास के साई बाबा के मंदिर दर्शन के लिए जाया जाये। उसने एक टैक्सी से जाने का निश्चय किया परन्तु उसे केवल दो टैक्सी वाले दिखे , उसनेँ एक टैक्सी वाले से कहा कि मुझे साईँ बाबा के मंदिर जाना है।
टैक्सी वाले ने कहा की 200 रूपए लूंगा , चलना है तो बोलो। पहलवान ने कुछ सोचा और अपनी चतुराई दिखते हुए बोला - इतने पास मंदिर है और उसके लिए 200 रूपए , टैक्सी वाले हो तो क्या लूट मचाओगे। मै अपना सामान लेकर खुद ही चला जाऊंगा। पहलवान ने सोचा की टैक्सी वाला उसके पीछे आ जायेगा और काम रूपए में उसे मंदिर छोड़ देगा ऐसा सोच वह काफी दूर तक सामान लेकर चलता रहा। परन्तु टैक्सी वाला नहीं आया।
कुछ दुरी चलने के बाद पहलवान को पुनः वह टैक्सी वाला दिखाई दिया। पहलवान ने सोचा की अब टैक्सी वाला अवश्य कम रूपए में चलने के लिए तैयार हो जायेगा। पहलवान ने दुबारा टैक्सी वाले से पूछा की अब मंदिर चलो और कितने रूपए लोगे , इस बार टैक्सी वाले ने 400 रूपए मांगे तो पहलवान हैरान हो गया और बोला की आधी दूरी तय कर ली है फिर भी 400 रूपए ऐसा क्यों ?
टैक्सी वाले ने जवाब दिया - महोदय, इतनी देर से आप साई मंदिर की विपरीत दिशा में चले जा रहे है जबकि शायद आपको ज्ञात नहीं है की मंदिर दूसरी दिशा में है। ऐसा सुनकर पहलवान को अपने ऊपर लज्जा आई और बिना कुछ सोचे उसने टैक्सी का दरवाजा खोला और उसमे बैठ गया।
इसी तरह जिंदगी के कई मुकाम में हम किसी चीज को बिना गंभीरता से सोचे सीधे काम शुरू कर देते है, और फिर अपनी मेहनत और समय को बर्बाद कर उस काम को आधा ही करके छोड़ देते है। किसी भी काम को हाथ में लेने से पहले पूरी तरह सोच विचार लेना जरुरी होता है। आप जो भी कार्य कर रहे है वो आपके लक्ष्य का हिस्सा है या नहीं।
हमेशा एक बात याद रखे की दिशा सही होने पर ही मेहनत पूरा रंग लाती है और यदि दिशा ही गलत हो तो आप कितनी भी मेहनत कर ले उसका कोई भी लाभ नहीं मिल पायेगा। इसीलिए सही दिशा तय करे और आगे बढे कामयाबी आपके हाथ जरूर थामेगी। किसी कार्य को सोच विचार कर करना आवश्यक होता है उसमे जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए , यदि आपको ऐसे कार्य में कही परेशानी आये तो दुसरो की राय भी ली जा सकती है परन्तु संयम बरतना आवश्यक होता है।
राजा ने फैसला सुनाया
एक नगर था वह के राजा का नाम विक्रमसेन था। वह राजा अपनी प्रजा की काफी देखभाल करता था। उसके राज्य में कोई भी दुखी नहीं था। गरीबो को दान देना तथा पंडितो की सेवा ही उसका परम कर्तव्य था।
राजा का मंत्री दीवान सिंह बड़ा ही जुल्मी व्यक्ति था। वह प्रजा पर बड़े कर लगाता था तथा जो कर नहीं देता था उसे पीटता था कोई भी राजा से शिकायत करने को कहता तो वह उसे जान से मारने की धमकी देता था।
एक दिन उसकी इस हरकत का पता राजा को चल गया। राजा ने बहुत डांटा फटकारा तथा ऐसा दुबारा भविष्य में न करने को कहा।
ऐसा करने पर भी दीवान सिंह नहीं सुधरा बल्कि उसने राजा से बदला लेने की ठान ली। राजा को शिकार का बड़ा शौक था। वह शिकार के लिए जंगल जाता तो बहुत से पशु पक्षियों को मार लाता।
राजा की पत्नी तारा को यह पसंद नहीं था उसने राजा को बहुत समझने की कोशिश की राजा ऐसा न करे परन्तु राजा ने उसकी पत्नी की भी नहीं सुनी।
एक दिन राजा जंगल में शिकार के लिए गया। मंत्री दीवान सिंह ने सोचा राजा को जंगल में ही मार डालूंगा तथा राज्य पर कब्ज़ा कर लूंगा और तारा को अपनी पत्नी बना लूंगा।
जब शिकार करते करते राजा बहुत थक गया तो उसने एक पेड़ की छाव में थोड़ी देर सुस्ताने की सोची। एक आम के पेड़ की छाँव में वह सुस्ताने लगा। मंत्री ने सोचा की अब मौका अच्छा है उसने एक बाण पर तीर चढाया तथा निशाना बांधने लगा।
एक हिरन झाड़ियों में छुपा यह सब देख रहा था। उसने राजा के प्राण बचने की सोची। जो ही मंत्री ने तीर छोड़ा हिरण ने तुरंत छलांग लगाई और राजा के सामने आ गया। तीर हिरण के पेट में जाकर लगा।
राजा की नींद खुल गई। जब राजा ने यह देखा तो उसे सारा माजरा समझ आ गया। राजा ने तुरंत ही बाण पर तीर चढ़ाया तथा मंत्री को मार गिराया। हिरण तब तक मर चूका था। राजा को अपने किये पर बहुत शर्मिंदगी महसूस हो रही थी।
अब राजा ने अपने दरबार में फैसला सुनाया कि वह आज से शिकार नहीं करेगा और पुरे राज्य में शिकार करना क़ानूनी अपराध माना जायेगा।
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