पाठको! राजस्थान जी के की इस पोस्ट के माध्यम से राजस्थान के प्रमुख समाचार पात्र तथा व्यक्तियों के उपनाम शामिल किये गए है जो की प्रतियोगी परीक्षा दृश्टिकोण से महत्वपूर्ण साबित होंगे। धन्यवाद !
राजस्थान के प्रमुख समाचार पत्र
राजस्थान से 1857 की क्रांति के बाद से सामाजिक परिवर्तन प्रारम्भ हुआ जिसका कारण अनेक प्रकार के समाचार पत्रों का प्रकाशित होना था। ये समाचार पत्र क्रांतिकारियों से जुड़े हुए समर्थित थे। राजस्थान के विभिन्न हिस्सों से इनका प्रकाशन राजस्थान में नई ऊर्जा का संचार पैदा करने वाला था।
1 . प्रताप नामक समाचार पत्र कानपूर से प्रकाशित हुआ तथा इसके संस्थापक श्रीगणेश शंकर विद्यार्थी थे।
2 . राजपुताना गजट नामक पत्र का प्रकाशन अजमेर से हुआ तथा इसके संस्थापक मौलवी मुराद अली थे।
3 . राजस्थान केसरी नामक समाचार पत्र प्रमुख समाचार था इस पत्र का सम्बन्ध विजय सिंह पथिक से था इसका प्रकाशन वर्धा नामक स्थान से हुआ। यह पत्र 1919 में प्रकाशित हुआ।
4 तरुण राजस्थान समाचार 1921 में अजमेर से प्रकाशित हुआ था तथा इसके संस्थापक मुंशी समर्थदान थे।
5 . आगीबाण नामक समाचार पत्र का प्रकाशन अजमेर से 1932 में हुआ यह जय नारायण व्यास द्वारा सम्पादित पत्र था।
6 . राजस्थान टाइम्स का प्रकाशन जयपुर से हुआ तथा वासुदेव शर्मा द्वारा इसका सम्पादन हुआ था।
7 . राजस्थान नामक पत्र 1923 में ब्यावर स्थान से प्रकाशित किया गया था। यह पत्र सज्जन सिंह जी के समय निकाला गया।
8 . सज्जन कीर्ति सुधाकर नामक पत्र 1876 में ब्यावर से निकाला गया।
9 . लोकवाणी नामक पत्र जो जयपुर से प्रकाशित हुआ था यह 1943 में देवी शंकर तिवारी जी द्वारा संस्थापित हुआ था।
10 . मेवाड़ का वर्तमान शासन अजमेर से प्रकाशित तथा माणिक्य लाल वर्मा द्वारा संस्थापित पत्र था।
11 . प्रजा सेवक जोधपुर से प्रकाशित पत्र था जो की अचलेश्वर प्रसाद वर्मा द्वारा संस्थापित हुआ।
12 . अखंड भारत नामक पत्र बम्बई से जयनारायण व्यास जी ने प्रारम्भ किया।
13 . नवज्योति नामक पत्र 1936 में अजमेर से रामनारायण चौधरी जी द्वारा शुरू किया गया।
2 . हमीर सिसोदिया को विषम घाटी पंचानन कहा जाता है।
3 . राजा मालदेव को हशमत वाला राजा कहा जाता है।
4 . शक्कर पीर बाबा को बांगड़ का धनी कहा जाता है।
5 . राव चन्द्रसेन को मारवाड़ का प्रताप कहा जाता है।
6 . जय नारायण व्यास को शेर-ए -राजस्थान कहा जाता है।
7 . गोकुल भाई भट्ट को राजस्थान का गाँधी कहा जाता है।
8 . भोगीलाल पांड्या को आदिवासीओ का गाँधी तथा बांगड़ का गाँधी भी कहा जाता है।
9 . कैलाश सांखला को टाइगर मन ऑफ़ इंडिया के नाम से जाना जाता है।
10 . राणा हम्मीर को मेवाड़ का उद्ध्धारक भी कहा जाता है।
11 . राव लूणकरण को कलियुग का कर्ण कहा जाता है।
12 . कुंवर पृथिवीराज को उड़ना राजकुमार कहा जाता है।
13 . राय सिंह को राजपूताने का कर्ण कहा जाता है।
14 . दामोदर व्यास को राजस्थान का लोहपुरुष भी कहते है।
15 . मोतीलाल तेजावत को आदिवासियों का मसीहा कहते है।
16 . राजेंद्र सिंह को वाटर मैन ऑफ़ इंडिया कहा जाता है।
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