बीकानेर के राठौड




पाठको! राजस्थान जी के अंतर्गत बीकानेर के राठौड़ महत्पूर्ण है, अतः आगामी परीक्षा क्रम को देखते हुए इस भाग को प्रकाशित किया गया है।  जिससे आपकी राजस्थान जी के की बेहतर तैयारी हो पाए , उम्मीद है आपको यह पोस्ट पसंद आएगा।  धन्यवाद !

बीकानेर के राठौड 

  • जोधपुर के राव जोधा के 5 वे पुत्र राव बीका ने 1488 में बीकानेर बसाया।  
  • बीका के पुत्र राव लूणकरण को इतिहास में "कलियुग का कर्ण" कहा गया है।  
  • बीकानेर के राव जैतसी का बाबर के पुत्र कामरान से संघर्ष हुआ। 
  • अकबर द्वारा 1570 ईस्वी से नागौर में आयोजित दरबार में बीकानेर राव कल्याणमल ने अपने पुत्र राय सिंह के साथ भाग लिया।  कल्याणमल बीकानेर का प्रथम शासक था, जिसने अकबर की अधीनता स्वीकार की। 
  • बीकानेर नरेशों में कल्याणमल ने गिरी सुमेल के युद्ध में शेरशाह सूरी की सहायता की थी।  
  • कल्याणमल का पुत्र पृथ्वी राज राठौड इतिहास में पीथल के नाम से जाना जाता है तथा पाथल महाराणा प्रताप को कहा जाता है।  
  • अकबर ने नागौर दरबार के बाद जोधपुर राज्य बीकानेर नरेश राय सिंह को सौंप दिया तथा जोधपुर नरेश चन्द्रसेन को जोधपुर छोड़कर भाद्राजून की पहाड़ियों में भाग जाने को विवश कर दिया।  
  • महाराजा राय सिंह ने मुगलो के लिए गुजरात, कंधार और काबुल अभियान किये।  
  • महाराजा राय सिंह ने अकबर और जहांगीर दो मुग़ल शासको की सेवा की थी।  
  • मुंशी देवी प्रसाद ने राजा राय सिंह को उदार तथा दानवीर स्वभाव के कारन 'राजपूतो का कर्ण' कहा है।  
  • रायसिंह ने रायसिंह महोत्सव तथा बाल बोधिनी की रचना की।  
  • राय सिंह ने निम्न अभियान में अकबर सेना का नेतृत्व किया 
  1. कठौली की लड़ाई (गुजरात मिर्जा बंधुओ के विरुद्ध)
  2. सिवाणा युद्ध (राव चन्द्रसेन के विरुद्ध)
  3. देवड़ा सुरताण का दमन (सिरोही में )
  • गंगानंद मैथिल कर्ण सिंह का आश्रित था, जिसने कर्णभूषण तथा काव्य डाकिनी नामक ग्रंथो की रचना की थी।  
  • अनूपसिंह के दरबार में प्रमुख दरबारी विद्वान् निम्न थे-मणिराम, आनन भट्ट, तीर्थ रत्नाकर,भाव भट्ट, अनूप संगीत विलास, अनूप संगीत रत्नाकर।  
  • राय सिंह शहजादा सलीम का विश्वासपात्र था।  अतः अकबर के बीमार पड़ने पर सलीम ने रायसिंह को दरबार में बुलाया।  
  • बीकानेर महाराजा दलपतसिंह को जहांगीर ने उसके अनुकूल आचरण नहीं होने के कारण कैद कर मृत्यु दंड दिया।  
  • महाराजा कर्ण सिंह को "जांगलधर बादशाह " कहा जाता था।  महाराजा अनूपसिंह को औरंगजेब ने "महाराजा" तथा "माही मरातिब" की उपाधि प्रदान की।  
  • महाराजा अनूप सिंह ने अनूपविवेक, कामप्रबोध तथा अनूपोदय आदि ग्रन्थ की रचना की।  
  • महाराजा कर्ण सिंह की नागौर नरेश अमरसिंह राठौड़ से मतीरे की बेल को लेकर लड़ाई हो गई  मतीरे की राड कहते है।  इस युद्ध में अमरसिंह राठौड़ मारा गया।  
  • किशनगढ़ में भी राठौड़ सत्ता का पृथक केंद्र था। 
  • किशनगढ़ का प्रसिद्द शासक सवंतसिंह था, जो कृष्ण भक्त होने के कारण नागरीदास के नाम से प्रसिद्द था।  
  • किशनगढ़ की स्थापना जोधपुर नरेश मोटाराजा उदयसिंह के पुत्र किशनसिंह ने की।  






















SHARE
    Blogger Comment
    Facebook Comment

0 comments:

Post a Comment