महाराणा सांगा / महाराणा संग्राम सिंह / हिन्दूपत




महाराणा सांगा / महाराणा संग्राम सिंह / हिन्दूपत 

महाराणा सांगा
महाराणा सांगा




  • भारतीय इतिहास में महाराणा सांगा "हिन्दूपत" के नाम से भी जाने जाते है। गागरोन के युद्ध के बारे में कहा गया है की फतह पाने के बाद दुश्मन को गिरफ्तार कर वापस उसको राज्य दे देना आज तक किसी दूसरे सुल्तान ने नहीं किया। इसी युद्ध में मालवा के सुल्तान मोहम्मद खिलजी द्वितीय को राणा सांगा ने बंदी बना कर रखा था।  
  • खानवा के युद्ध में बाबर ने जेहाद घोषित कर रखा था। युद्ध में विजय के उपरांत बाबर ने गाजी की उपाधि धारण की। चंदेरी के युद्ध को बाबर ने जेहाद घोषित कर रखा था।  
  • खानवा के युद्ध का प्रमुख कारण उत्तर भारत में सर्वोच्च सत्ता स्थापित करना था।  तथा इसका यह परिणाम हुआ की यह सत्ता मुगलो के हाथ में चली गई।  इस युद् में बाबर की विजय का कारण उसके पास तोपखाना (तुलगमा पद्धत्ति ) का होना था।  

  • राणा सांगा या संग्राम सिंह के शरीर पर 80 घाव थे तथा एक आँख, एक हाथ और एक पैर उसने युद्ध मेंगँवा दिए। 
  • राणा सांगा के दरबार में हमेशा 7 राजा, 9 राव तथा 104 सरदार हमेशा सेवा में उपस्थित रहते थे। विक्रमादित्य के शासन में गुजरात के शासक ने चित्तोड़ पर आक्रमण किया। इस अवसर पर माता कर्मावती ने मुग़ल बादशाह को राखी भिजवाकर सहायता मांगी थी। विक्रमादित्य की हत्या करके सांगा के भाई कुंवर पृथ्वीराज को अवैध दासीपुत्र बनाकर मेवाड़ का शासक बनाया।  
  • बनवीर ने सांगा के पुत्र उदयसिंह की हत्या का प्रयास किया किन्तु उसकी धाई पन्ना ने अपने पुत्र चन्दन का बलिदान देकर उदयसिंह की रक्षा की।  पन्नाधाय पुत्र के बलिदान तथा स्वामिभक्ति के लिए प्रसिद्द है।  

  • महाराणा सांगा का राज्याभिषेक 1509 ईस्वी में हुआ था , राणा सांगा और इब्राहिम लोदी के बीच 1518 ईस्वी में खातोली (बूंदी) का युद्ध हुआ जिसमे राणा विजयी हुआ।  
  • मांडू के सुल्तान महमूद खिलजी द्वितीय और राणा सांगा के बीच 1519 में गागरोन का युद्ध हुआ। 17 मार्च 1527 ईस्वी में राणा सांगा और बाबर के मध्य खानवा का युद्ध (भरतपुर) में हुआ जिसमे राणा सांगा की पराजय हुई। बाड़ी का युद्ध 1519 ईस्वी में राणा सांगा तथा इब्राहिम लोदी के बीच हुआ जिसमे राणा सांगा विजय हुए। 

  • मारवाड़ के शासक राव गंगा तथा उनका पुत्र मालदेव, चंदेरी का मेदिनीराय मेहता का रायमल राठौड़ और हसन खा मेवाती ने भी राणा सांगा का खानवा युद्ध में साथ दिया था।  हलवद (काठियावाड़) के शासक झाला राजसिंह के पुत्र झाला अजना को राणा सांगा का राज्य चिह्न धारण कर हाथी पर बैठा दिया।  
  • राणा सांगा अंतिम हिन्दू राजा था जिसके सेनापतित्व में सब राजपूत जातिया विदेशियों को भारत से निकलने के लिए सम्मिलित हुई और मध्यकालीन भारत का वह अंतिम हिन्दूपत था।  
  • राणा सांगा के पुत्र विक्रमादित्य के समय गुजरात के बहादुरशाह ने चित्तोड़ पर 2 आक्रमण किये।  
  • राणा सांगा की विधवा पत्नी कर्मावती ने हुमांयू के पास राखी भेज कर अपने पुत्र विक्रमादित्य के लिए सहायता मांगी थी।  












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