राजस्थान के भौतिक भू - भाग -
PHYSICAL DIVISION OF RAJASTHAN
![]() |
| राजस्थान के भौतिक भू - भाग |
प्राचीनकाल में विश्व 2 भू खंडो अंगारा लेंड तथा गौड़वाना लेंड में विभक्त था। इन दोनों के मध्य टेथिस महासागर था। राजस्थान का अधिकांश पश्चिमी तथा उत्तरी पूर्वी भाग टेथिस महासागर का ही अवशेष है जबकि अरावली पर्वत विश्व के प्राचीन पर्वतो में से है जो गोंडवाना लेंड के ही भाग थे। दक्षिण पूर्व का पठारी भाग भी गोंडवाना लेंड का ही अवशेष है।
राज्य के चार भौतिक प्रदेशो में सर्वप्रथम अरावली पर्वतमाला का निर्माण हुआ। इसके पश्चात दक्षिणी पूर्वी , पूर्वी मैदान तथा पश्चिमी रेतीले मैदान (थार मरुभूमि) का निर्माण हुआ।
उत्तरी पश्चिमी मरुस्थल
इस क्षेत्र की बात की जाये तो यह क्षेत्र राज्य के 58 % भू भाग पर स्थित है तथा राज्य की 30% जनसँख्या रखता है। इसी प्रकार कुल मरुस्थलीय जनसंख्या का 40 % तथा कुल मरुस्थलीय भाग का 61.11% भाग रखता है। इस प्रदेश का पूर्वी भाग मारवाड़ कहलाता है , इस प्रदेश का पश्चिमी भाग थार का मरुस्थल कहलाता है। थार मरुस्थल पश्चिम में 644 किमी लम्बा तथा पूर्व में 360 किमी लम्बा है। राज्य में इसे थाली के नाम से भी जाना जाता है। थार विश्व का सर्वाधिक आबादी वाला तथा जैव विविधता वाला मरुस्थल है। इस प्रदेश को शुष्कता के आधार पर 2 भागो में बांटा जा सकता है 25 सेमी तक वर्षा वाला क्षेत्र तथा 25 सेमी से 50 सेमी वर्षा वाला क्षेत्र।
लूनी जवाई बेसिन क्षेत्र के अंतर्गत जोधपुर, पाली, जालोर तथा सिरोही जिले आते है। इस भाग में पचपदरा , संवरला और कपरड़ा जल के गर्त है।
- रेतीला मरुस्थल भाग बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर और पश्चिमी नागौर जिले के अंतर्गत आता है। इसमें बालुका स्तूप का विस्तार पाया जाता है।
- चट्टानी मरुस्थल जैसलमेर में पोकरण तथा रामगढ के बीच तथा बाड़मेर जालोर के मध्यवर्ती भाग में है। जैसलमेर के रुद्रवा में पथरीला मरुस्थल पाया जाता है। यहाँ चुना पत्थर और बालुका पत्थर की चट्टान है।
यह भी पढ़े - राजस्थान सामान्य ज्ञान
- शेखावाटी क्षेत्र में तालछापर और परिहार प्रमुख रन क्षेत्र है।
- नागौरी उच्च प्रदेश 300-500 मीटर की औसत उचाई का क्षेत्र है इस क्षेत्र में कुचामन, डेगाना, सांभर और डीडवाना क्षेत्र आते है।
- घग्गर का मैदान के अंतर्गत गंगानगर और हनुमानगढ़ जिले आते है।
- बरखान- रेगिस्तान में रेत के टीले बरखान कहलाते है। ये एक स्थान से दूसरे स्थान पर गतिशील रहते है। इस क्षेत्र में लिग्नाइट, खनिज तेल, प्राकृतिक गैस और लाइम स्टोन के विशाल भंडार पाए जाते है। इस क्षेत्र की प्रमुख फसल बाजरा, मोंठ और ज्वार है। इस क्षेत्र में सर्वाधिक पशु सम्पदा बाड़मेर में पाई जाती है। इस क्षेत्र का सबसे गर्म स्थान फलौदी है।
यह भी पढ़े - राजस्थान के प्रमुख प्रजामण्डल
अरावली पर्वतीय प्रदेश
अरावली पर्वतमाला गुजरात के चम्पारण जिले से उत्तर पूर्व में राजस्थान के खेतड़ी तक फैली हुई है। चम्पारण से दिल्ली तक इसकी लम्बाई 692 किमी है , इसमें से राजस्थान में इसका विस्तार 550 किमी यानि 80% है। यह पर्वतमाला राजस्थान के 12.65% भू भाग पर फैली है। अरावली विश्व की प्राचीनतम वलित पर्वतमाला है। भारतीय हिमालय और विंध्याचल के बीच यह सबसे उची पर्वतमाला है। उचाई के आधार पर अरावली पर्वतमाला को 3 उप भागो में बाँट सकते है।
- गुरुशिखर - यह राजस्थान की सर्वोच्च चोटी (1722 मीटर ) है। यह सिरोही जिले के अंतर्गत आती है। कर्नल जेम्स टॉड ने गुरुशिखर को संतो का शिखर कहा है।
- भोरठ का पठार - कुम्भलगढ़ (राजसमंद) गोगुन्दा के बीच अरावली एक पत्थर के रूप में फैली है। जिसे भोरठ का पठार कहा जाता है। इसकी सबसे ऊंची पर्वत चोटी जरगा (1223 मीटर ) है।
- गिरवा- उदयपुर शहर तश्तरीनुमा आकृति वाले पहाड़ो की श्रंखला के बीच स्थित है इसे गिरवा कहा जाता है। अरावली का सर्वाधिक विस्तार उदयपुर जिले में और सबसे कम अजमेर जिले में है।
- अरावली राजस्थान में खेतड़ी से प्रवेश करती है और खेड़ब्रम्हा (सिरोही ) से बहार निकलती है।
- बनास नदी अरावली के सामानांतर बहती है।
पूर्वी मैदान
इस प्रदेश का ढाल पूर्वी दिशा की और है। इसी क्षेत्र में सर्वाधिक उद्योग धंधे लगे हुए है। अरावली पर्वतमाला के पूर्व में स्थित इस क्षेत्र में चम्बल, बनास, बाणगंगा और इनकी सहायक नदिया प्रवाहित होती है। धरातलीय विभिन्नता के आधार पर इसे चम्बल बेसिन और बनास बाणगंगा बेसिन में बांटा जा सकता है। सर्वाधिक बीहड़ क्षेत्र सवाई माधोपुर में पाया जाता है।
- बीहड़ भूमि- नदी के द्वारा मिटटी कटाव के कारण बनी गहरी घाटियों युक्त भूमि को बीहड़ भूमि कहते है।
- खादर- चम्बल बेसिन में गहरे खड्डो युक्त बीहड़ भूमि को स्थानीय भाषा में खादर कहते है।
दक्षिणी पूर्वी पठारी क्षेत्र (हाड़ौती पठार)
यह प्रदेश मालवा पत्थर का उत्तरी भाग है जो मुख्यत : कोटा, बांरा, बूंदी और झालावाड़ जिलों में विस्तृत है। यह पठारी भाग दक्षिण के पठार से समानता रखते है। इस क्षेत्र में बहने वाली नदियों में इस पठारी भाग में छोटी छोटी घटिया बना ली है। चम्बल नदी इसी पठारी भाग से होकर बहती है।
यह भी पढ़े - राजस्थान में जनजाति आंदोलन

0 comments:
Post a Comment