राजस्थान के प्रमुख और प्रसिद्द मंदिर
- शीतलेश्वर महादेव मंदिर - झालावाड़ के झालरापाटन में चंद्रभागा नदी के तट पर स्थित यह मंदिर राजस्थान का सबसे पुराना तिथि युक्त (689 ईस्वी) मंदिर है।
- एकलिंग जी का मंदिर - यह मंदिर कैलाशपुरी (उदयपुर ) में स्थित है, इसका निर्माण मेवाड़ के गुहिल वंश शासक बाप्पा रावल में करवाया था तथा इसे वर्तमान स्वरुप महाराणा रायमल ने दिया। मेवाड़ महाराणाओं के इष्टदेव एकलिंग जी का लकुलीश मंदिर है।
- किराडू के मंदिर (बाड़मेर ) - गुर्जर प्रतिहार शैली का सबसे भव्य तथा अंतिम मंदिर किराडू का सोमेश्वर मंदिर शिल्पकला के लिए विख्यात है। कामशास्त्र की मूर्तियों के कारण किराडू को 'राजस्थान का खजुराहो' कहा जाता है। शिल्पकला के लिए विख्यात किराडू के प्राचीन मंदिर ग्यारहवीं-बारहवीं शताब्दी के बने हुए है।
- कैला देवी मंदिर (करौली)- यादव वंश की कुलदेवी कैलादेवी का मंदिर करौली में है जहा लांगुरिया गीत गाये जाते है।
- शिला देवी मंदिर (आमेर) - आमेर (जयपुर) में स्थित इस मंदिर का निर्माण महाराजा मानसिंह प्रथम ने करवाया था। ये शिला देवी महषिमर्दिनी की मूर्ति बंगाल से जीतकर लाये थे।
- सच्चिया माता मंदिर (ओसिया )- जोधपुर जिले के ओसिया में सच्चिया माता का मंदिर शिल्पकला का उत्कृष्ट नमूना है। यह हिन्दुओं और ओसवाल समाज की पूज्य देवी है।
- सास बहु मंदिर (नागदा) - उदयपुर जिले में नागदा में स्थित युगल मंदिर के रूप में प्रसिद्द सास बहु का मंदिर बना हुआ है यह मंदिर पंचायतन शैली में निर्मित है तथा भगवान विष्णु को समर्पित है।
- श्रीनाथ जी मंदिर (नाथद्वारा ) - राजसमंद जिले में स्थित यह मंदिर पुष्टिमार्गीय वैष्णव का प्रमुख तीर्थ स्थल है। यहाँ कृष्ण के बालरूप की उपासना की जाती है। श्रीनाथ जी के स्वरुप के पीछे कृष्णलीला विषयक पट लगाया जाता है जिसे पिछवाई कहा जाता है।
- गोविन्ददेव जी का मंदिर (जयपुर) - यह मंदिर गौड़ीय संप्रदाय का प्रमुख मंदिर है। यहाँ राधाकृष्ण के युगल रूप को पूजा जाता है। जयपुर नरेश सवाई जयसिंह द्वितीय ने वृन्दावन से लाकर जयपुर में इसे प्रतिस्थापित करवाया था।
- जगत शिरोमणि मंदिर (आमेर) - महाराजा मानसिंह की पत्नी कलावती ने अपने पुत्र जगतसिंह की स्मृति में करवाया था। इस मंदिर में मीरा द्वारा चित्तोड़ में आराधना की गयी काले पत्थर की कृष्ण की मूर्ति को प्रतिष्ठित किया गया था जिसे मानसिंह चित्तोड़ से लाया था।
- जगदीश मंदिर (उदयपुर) - मेवाड़ महाराजा जगतसिंह प्रथम ने 1651 में इसका निर्माण करवाया था। इसे सपने में बना मंदिर भी कहा जाता है। इस मंदिर में भगवान विष्णु की काले पत्थर की पांच फ़ीट उची प्रतिमा स्थापित है। कर्नल टॉड, गौरीशंकर हीराचंद ओझा तथा कविराजा श्यामलदास आदि ने इस मंदिर की मुक्तकंठ से प्रशंसा की है।
- जैन मंदिर (दिलवाड़ा) - सिरोही जिले में आबू पर्वत पर स्थित है, इसका निर्माण गुजरात के चालुक्य राजा भीमदेव में मंत्री विमलशाह ने निर्माण करवाया। यह मंदिर प्रथम जैन तीर्थकर ऋषभदेव या आदिनाथ को समर्पित है और इसे विमलशाही के नाम से जाना जाता है। दूसरा नेमिनाथ का मंदिर वास्तुपाल और तेजपाल ने बनवाया था। इस मंदिर को लूणवसही के नाम से भी जाना जाता है।
- बाड़ौली के शिवमंदिर - चित्तौरगढ़ जिले के बाड़ौली में स्थित यह मंदिर गुर्जर प्रतिहार महामारू शैली अर्थात पंचायतन शैली में बना हुआ है। इस मंदिर का निर्माण हूण शासक तोरमाण के पुत्र मिहिलकुल ने करवाया था।
- शिवमंदिर (भंडदेवरा ) - बांरा जिले के रामगढ में स्थित भंडदेवरा के शिवमंदिर का निर्माण मेदवंशीय राजा मलय वर्मा ने 10 वि शताब्दी में करवाया था। इसे "हाड़ौती का खजुराहो" कहा जाता है।
- गणेश मंदिर (रणथम्भौर) - सवाई माधोपुर के रणथम्भौर दुर्ग में त्रिनेत्र गणेश जी का प्रसिद्द मंदिर है जहा गणेश चतुर्थी अर्थात भादो शुक्ल चतुर्थी को मेला भरता है।
- रणकपुर जैन मंदिर - इस दुर्ग का निर्माण महाराणा कुम्भा के शासनकाल में धरणकशाह ने करवाया था। इस मंदिर को शिल्प विशेषज्ञ देपाक के निर्देशन में बनवाया था। यह प्रथम जैन तीर्थकर ऋषभनाथ आदिनाथ को समर्पित है। यह मंदिर 1444 खम्भों पर टिका है इसलिए इसे खम्भों का अजायबघर कहा जाता है। यह मंदिर चौमुखा मंदिर भी कहलाता है।
- करणी माता मंदिर - बीकानेर के राठौड़ो की कुल देवी करणी माता का मंदिर बीकानेर के देशनोक में स्थित है। राजस्थान ही नहीं विश्व में चूहों की देवी के रूप में विख्यात है। इस मंदिर में सफ़ेद चूहों को काबा कहा जाता है।
पाठको ! उम्मीद करते है आपको राजस्थान के प्रमुख और प्रसिद्द मंदिर लेख पसंद आया होगा। आशा करते है राजस्थान जी के अंतर्गत राजस्थान के प्रमुख मंदिर आगामी परीक्षा दृष्टिकोण से महत्पूर्व रहेगा।
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