पाठको ! आपके द्वारा हिंदी कहानियो को सराहने के लिए धन्यवाद, समय समय पर आपके लिए मनोरंजक तथा ज्ञानवर्धक कहानिया प्रस्तुत की गई है। इसी क्रम में "बलिदानी राजा" नामक कथा प्रस्तुत है।
बलिदानी राजा
बात उन दिनों की है जब हमारे देश में आजादी की पहली लड़ाई सन 1857 में छिड़ी हुई थी। हैदराबाद के पास जोरपुर नाम की एक छोटी से रियासत थी। उन दिनों वह बहुत कम उम्र का एक राजा राज्य करता था। वह आजादी के दीवानो की सच्चे दिल से सहायता कर रहा था। अंग्रेजो से जूझने के लिए उसने अरब और रोहिला पठानों की एक शक्तिशाली फ़ौज भी संगठित की थी।
फरवरी 1858 वह राजा हैदराबाद आया हुआ था। उसके आने की खबर किसी तरह हैदराबाद के निजाम के वजीर सालारजंग को लग गई। जो अंग्रेजो का पिट्ठू था। उसने राजा को गिरफ्तार कराकर अंग्रेजो को सौप दिया।
एक अंग्रेज फौजी अधिकारी कर्नल मेरोज टेलर की राजा से खूब पटती थी। राजा उसका आदर करता था तथा उसे प्यार से "कापा" कहता था। टेलर राजा से मिलने जेल गया और अन्य के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की। परन्तु राजा ने कापा को मना कर दिया। तब टेलर वापस चले गए पर पुनः एक दिन राजा से मिलने की इच्छा करते हुए वापस आये और बोले, "यदि तुम अपने अन्य विप्लवकारियो मित्रो के नाम पते बता दो तो तुम्हे क्षमादान दे दिया जायेगा। "
इस पर राजा ने तपाक से कहा, "जब मै मौत के मुँह में जाने को ख़ुशी ख़ुशी तैयार हूँ तो क्या मै विश्वासघात करके अपने क्रन्तिकारी देशभक्तो के नाम आपको बतला दूँ?" नहीं कापा साहब, ऐसा हरगिज नहीं हो सकता। तोप या कालापानी ये सब, सचमुच, मेरे लिए भयंकर नहीं है, जितना भयंकर षड्यंत्र है।
कर्नल टेलर ने राजा को धमकाते हुए कहा, "तुम्हे प्राणदंड दिया जायेगा।"
राजा ने अनुरोध किया, "कापा साहब, आप मुझ पर मेहरबानी करे। मुझे फांसी पर न लटकाये। मै कोई चोर उचक्का नहीं हूँ। कृपा करके मुझे तोप के मुँह से उड़ा दीजिये। तब, आप देखिएगा की मै कितनी शांति से कितनी शान से, आग उगलती तोप के मुँह के सामने खड़ा रह सकता हूँ।
टेलर के कहने से प्राणदंड के बजाये कालापानी की सजा राजा को दी गई।
वह किशोर राजा बार बार कहता रहा कि काला पानी के बजाये मै मौत पसन्द करूँगा और मेरी जनता का एक साधारण व्यक्ति भी कैद या कालेपानी की सजा को पसंद नहीं करेगा, तब मै तो उनका नायक हूँ। लेकिन उनकी यह प्रार्थना ठुकरा दी गई।
जब उसे कालेपानी भेजा जा रहा था, तब उसने हंसी हंसी में ही अंग्रेज पहरेदार की पिस्तौल ले ली और मौका पाकर अपने ऊपर गोली दाग दी।
इस प्रकार वह अपनी मातृभूमि की बलिवेदी पर न्योछावर हो गया।
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