पाठको! भारतीय इतिहास तथा संस्कृति से जुड़े सभी महत्वपूर्ण तथ्यों में इस पोस्ट के माध्यम से शैव धर्म तथा वैष्णव धर्म को बतलाया गया है। आगामी प्रतियोगी परीक्षाओ की तैयारी हेतु इसे तैयार किया गया है। धन्यवाद !
शैव धर्म
- भगवान शिव की पूजा करने वाले को शैव तथा शिव से सम्बंधित धर्म को शैव धर्म कहा गया है।
- शिवलिंग उपासना का प्रारंभिक पुरातात्विक साक्ष्य हड़प्पा संस्कृति के अवशेषों से मिलता है।
- ऋग्वेद में शिव के लिए "रूद्र" नामक देवता उल्लेख है।
- अथर्ववेद में शिव को भव, शव, पशुपति, तथा भूपति कहा गया है।
- लिंग पूजा का प्रथम स्पष्ट वर्णन मत्स्य पुराण में मिलता है।
- महाभारत के अनुशासन पर्व से भी लिंग पूजा का वर्णन मिलता है।
- "वामन पुराण" में शैव संप्रदाय की संख्या चार बताई गई है जो की पाशुपत, कापालिक, कालामुख, तथा लिंगायत है।
- पाशुपत संप्रदाय शैवों का सर्वाधिक प्राचीन संप्रदाय है , इसके संस्थापक लकुलीश है जिन्हे भगवान शिव के 18 अवतारों में से एक माना जाता है।
- पाशुपत सप्रदाय के अनुयायी को पंचार्थिक कहा जाता है , इस मत का प्रमुख सैद्धांतिक ग्रन्थ पाशुपत सूत्र है। कापालिक संप्रदाय के प्रमुख या इष्टदेव भैरव थे। इस संप्रदाय का प्रमुख केंद्र श्री शैल नामक स्थान था। कालमुख संप्रदाय के अनुयायियों को शिव पुराण में महाव्रतधर कहा गया है। इस संप्रदाय के लोग नर कपाल में ही भोजन, जल तथा सुरापान करते है और साथ ही अपने शरीर पर चिता की भस्म मलते है। लिंगायत संप्रदाय दक्षिण में प्रचलित है। इन्हे जंगम भी कहा जाता है। इस संप्रदाय के लोग शिव लिंग की उपासना करते है।
- वसव पुराण में लिंगायत संप्रदाय के प्रवर्तक अलभ प्रभु तथा उनके शिष्य वासव को बताया गया है , इस संप्रदाय को वीरशिव संप्रदाय भी कहा जाता है।
- 10 वि शताब्दी में मत्स्येन्द्रनाथ ने नाथ संप्रदाय की स्थापना की। इस सम्प्रदय का व्यापक प्रचार प्रसार बाबा गोरखनाथ के समय में हुआ।
- दक्षिण भारत में शैवधर्म चालुक्य, राष्ट्रकूट, पल्लव, तथा चोलो के समय लोकप्रिय रहा।
- पल्लव काल में शैव धर्म का प्रचार प्रसार नायनारो द्वारा किया गया। नायनार संतो की संख्या 63 बताई गई है।
- एलोरा का प्रसिद्ध मंदिर (कैलाश मंदिर) का निर्माण राष्ट्रकूट, पल्लव तथा चोलो के समय लोकप्रिय रहा।
- एलोरा के प्रसिद्द मंदिर का निर्माण राष्ट्रकूटों ने करवाया।
- चोल शासक राजराज प्रथम ने तंजोर में प्रसिद्द राजराजेश्वर शैव मंदिर का निर्माण करवाया जिसे वृहदेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
- कुषाण शासको की मुद्रा पर शिव और नंदी का एक साथ अंकन प्राप्त होता है।
वैष्णव धर्म
- वैष्णव धर्म के बारे में प्रारंभिक जानकारी उपनिषदों से मिलती है। इसका विकास भगवत धर्म से हुआ है।
- वैष्णव धर्म के प्रवर्तक कृष्ण थे जो वृषण कबीले के थे और जिनका निवास स्थान मथुरा था।
- कृष्ण का सर्वप्रथम उल्लेख छान्दोग्य उपनिषद में देवकी पुत्र और अंगिरस के शिष्य के रूप में हुआ है।
- विष्णु के 10 अवतारों का उल्लेख मत्स्य पुराण में मिलता है। ये दस अवतार निम्न है - मत्स्य, कूर्म, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, बलराम, बुद्ध और कल्कि।
- वैष्णव धर्म में ईश्वर को प्राप्त करने के लिए सर्वाधिक महत्त्व भक्ति को दिया गया है।
- वैष्णव संप्रदाय का मत विशिष्ट अद्वैत है तथा इस संप्रदाय के आचार्य रामानुज थे।
- रूद्र संप्रदाय का मत शुद्ध अद्वैत है तथा इसके आचार्य वल्लभाचार्य है।
- सनक संप्रदाय का मत द्वैताद्वैत है तथा इसके आचार्य निम्बार्क है।
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