hindi story- राजकुमार अज और राजकुमारी इंदुमती



राजकुमार अज और राजकुमारी इंदुमती 


कौशल का पडोसी राज्य था विदर्भ।  वहा के राजा भोज थे।  उसकी बहन इंदुमती बहुत सुन्दर थी।  राजा भोज ने अपनी बहन इंदुमती के स्वयंवर में राजकुमार अज को सम्मिलित होने के लिए पराक्रमी कौशल नरेश रघु के निमंत्रण भेजा।  राजा रघु ने राजकुमार अज को विवाह के योग्य और भोज के सम्बन्ध के औचित्य को समझ स्वयंवर में जाने की अनुमति दे दी।

राजकुमार अज स्वयंवर में भाग लेने के लिए विशाल सेना के साथ रवाना हो गए। जब राजकुमार नर्मदा नदी के तट पर पड़ाव डेल हुए थे, तो अचानक विशालकाय मदमस्त हाथी ने सेना में हड़कंप मचा दी।  वह सैनिको, घोड़ो तथा रथो को कुचलने लगा।  किसी के वश में नहीं आ रहा था वह हाथी।  सेनापति ने इस घटना का वर्णन राजकुमार अज को दिया।  राजकुमार ने होना धनुष लिया और जिस दिशा में हाथी था उस दिशा की और चल दिए।  राजकुमार ने हाथी को देखते ही उस हाथी के मस्तक पर तीर का निशाना साधा।  वह तीर हाथी के मस्तक पर लगा और हाथी तुरंत धरती पर गिर गया, परन्तु जैसे ही हाथी जमीन पर गिरा उसके स्थान पर बहुत ही सुन्दर जीवित मनुष्य हाथ जोड़कर खड़ा हो गया।

राजकुमार अज ने उस सुन्दर मनुष्य से उसका परिचय पूछा -'तुम कौन हो और यह उत्पात किस वजह से कर रहे थे?'

उसने कहा - "राजकुमार, मेरा नाम वंश है तथा मै गंधर्वराज प्रियदर्शन का पुत्र हूँ।  मतंग मुनि के शाप से हाथी रूप से विचरण कर रहा था। मुनि ने मेरा उद्धार आपके ही हाथो हेतु निश्चित किया था। अतः मेरे उद्धार हेतु मैंने यह सब किया।  इसके लिए मै क्षमा चाहता हूँ।  परन्तु राजकुमार आपने मेरा उद्धार किया है इसके लिए मै आपको "सम्मोहन अस्त्र" प्रदान करता हूँ।  यह अस्त्र आपको युद्ध की कठिन परिस्थियों में भी आपको विजय दिलाएगा। "

गन्धर्व वंश और राजकुमार अज में दोस्ती हो गई और अज में गन्धर्व से विदा लेकर विदर्भ की और प्रस्थान किया। स्वयंवर में हजारो राजकुमार भाग लेने आये थे।  राजकुमार अज की सुंदरता को देखकर राजकुमारी इंदुमती ने वरमाला राजकुमार अज के गले में डाल दी।

इस घटना से वह उपस्थित अन्य राजकुमार क्षुब्ध हो गए और उन्होंने अज और इंदुमती को कौशल और विदर्भ के बीच के मार्ग में घेरने का सोचा।  जब अज और इंदुमती मार्ग में पहुंचे तो अन्य राजकुमारों के द्वारा युद्ध शुरू कर दिया गया और इसमें राजकुमार अज अकेले पड़ गए। घमासान युद्ध में राजकुमार अज को ऐसा लगा की वे युद्ध में कमजोर पड़ रहे है और उन्हें गन्धर्व वंश के द्वारा दिए "सम्मोहन अस्त्र" की याद आई।  अज ने अस्त्र की सहायता से विजय प्राप्त की और अपनी नगरी में राजकुमारी इंदुमती के साथ प्रवेश किया। वह अज को राज्य का नया राजा घोषित कर दिया गया।

एक दिन प्रजापालक राजा अज अपनी रानी इंदुमती के साथ अपने महलो के उद्यान में विहार कर रहे थे कि उसी समय भगवान शंकर की वीणा बजाकर नारदजी आकाश मार्ग से चले जा रहे थे।  उनकी वीणा पर अत्यधिक सुगंध वाली दिव्य पुष्पों की माला गुंधी हुई थी।  वह माला नारदजी की वीणा से छिटक कर रानी इंदुमती के ऊपर आ गिरी।  उस माला के आघात से इंदुमती की मृत्यु हो गई।  राजा अज विलाप करते करते मूर्छित हो गए।

राजा के सचेत होने पर कुलगुरु ने धीरज बांधते हुए इंदुमती के पूर्व जन्म की कथा सुनाई - "राजन, एक बार बिंदु ऋषि कठोर तपस्या कर रहे थे। उनकी उग्र तपस्या से डरकर इंद्र ने उनकी तपस्या भंग करने के लिए हरिणी नाम की अप्सरा भेजी।  मुनि ने तपस्या में बाधा डालने के कारण क्रोध से अप्सरा को शाप दे दिया कि तू पृथ्वी पर जाकर मनुष्य की स्त्री हो जा।  अप्सरा की प्रार्थना पर ऋषि ने कहा की जब तक तुम्हे स्वर्गीय पुष्प नहीं दिखाई देगा जब तक तुम्हे पृथ्वी पर रहना होगा। वही अप्सरा विदर्भ वंश में उत्पन्न हो इंदुमती नाम से आपकी रानी बनी। आप शाप की निवृति के कारण आकाश मार्ग से जाते हुए नारदजी की वीणा से गिरी स्वर्गीय पुष्पमाला को देख कर वह शाप से मुक्त हो स्वर्ग को चली गई है। "


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