hindi story - जिसका सूरज उसके पास



जिसका सूरज उसके पास 


बहुत पुरानी  बात है।  गोवर्धन नाम का एक राजा था।  वह बहुत ही  सनकी था।  अपनी नासमझी के कारण कई बार वह अपनी प्रजा को संकट में डाल देता था। उसके मंत्री का नाम चतुर सिंह था, जो नाम के अनुरूप ही चतुर था।  वह समय समय पर अपनी बुद्धि से प्रजा को मुसीबतो से छुटकारा दिलाता।

नगर के एक और नदी बहती थी।  बहाव पश्चिम से पूर्व की और था।  एक दिन सुबह सुबह गोवर्धन अपने मंत्री के साथ नदी के किनारे सैर के लिए गया।  उसे नदी में कल कल बहता पानी देखकर बड़ा मजा आ रहा था। अचनाक उसके मन में एक प्रश्न आया।  उसने चतुरसिंह से पूछा-" मंत्री जी, हमारे राज्य का इतना पानी रोज जाता कहा है?"

'पूर्व दिशा में महाराज। " मंत्री ने उत्तर दिया।

"क्या? राजा चौका।  'हमारा पानी पूर्व दिशा के लोग इस्तेमाल करते है। तुरंत राज्य की सीमा पर नदी के आर पर एक दीवार बना दी जाये।  हमारा पानी हमारे ही राज्य में रोका जाये।"

मंत्री सोचा- यह राजा सनकी है।  पर आज्ञा तो माननी पड़ेगी।  बस, उसने तुरंत नदी पर दीवार नानने का आदेश दे दिया।
नदी का बहाव रुकने के कारण पानी धीरे धीरे जंगलो और खेतो में होता हुआ नगर में भरने लगा।  लोग भागे भागे चतुरसिंह के पास पहुंचे।
"मंत्रीजी, घोर अनर्थ हो रहा है।  नगर में बाढ़ आ गई है।  हमारा जीवन खतरे में है।  हमें बचाइए। "

"दोस्तों, मै स्वयं चिंतित हूँ।  आप लोग जानते है की राजा ने नदी पर दीवार बनवा दी है।  इसी कारण नगर में बाढ़ आ गई है। " मंत्री बोला।
"तब तो हम सब डूब जायेंगे। आप कुछ उपाय कीजिये न। " राज्य के लोगो ने कहा।

मंत्री कुछ सोचकर बोला- "आप लोग अपने अपने घर जाइये।  अपने सामान की रक्षा कीजिये।  मै शीघ्र ही कोई उपाय करता हूँ।" जब लोग चले गए तो मंत्री महल की और चल दिया। महल तक पहुंचते पहुंचते उसने इस मुसीबत से निपटने का उपाय भी सोच लिया।

महल के ऊपर एक बड़ा सा घंटा लगा था।  एक सेवक हर घंटे के बाद उसे बजाकर समय की सुचना देता था।  मंत्री ने उसे बुलाकर आदेश दिया- "आज शाम छह बजे से समय की सुचना हर आधे घंटे के बाद देना।

सेवक आदेशानुसार हर आधे घंटे बाद एक एक घंटे सूचना देने लगा।  जब रत के बारह बजे, तो सेवक ने सुबह छह बजे का घंटा बजा दिया।  महाराज ने सुबह छह बजे का घंटा सुना तो चौंक गए। उनकी आँखे नींद के कारण बोझिल थी।  शरीर टूट रहा था।  उन्हें चारो और अंधकार नजर आ रहा था और वो सोच में पड़ गए -"कमाल है।  सुबह के छह बजे भी इतना अँधेरा।  आज सूरज क्यों नहीं निकला।  दिन के समय तारे कैसे चमक रहे है। "

उन्होंने मंत्री को बुलवा लिया।  मंत्री तो पहले से ही इसके लिए तैयार थे।  पालक झपकते ही मंत्री वहा आ पहुंचे।  उसे देखते ही राजा ने क्रोधित होकर पूछा- "यह सब क्या हो रहा है ? सुबह के छह बजे भी सूरज का नामोनिशान नहीं।  दिन में तारे दिखाई दे रहे है। "

मंत्री अपनी योजना पर प्रसन्न होते हुए बोला- "महाराज अब आप सूर्य को कभी नहीं देख सकेंगे। "

"लेकिन ऐसा क्यों?" राजा ने भय और आश्चर्य से पूछा -"क्या हम सूर्य को अब कभी नहीं देख सकेंगे। "

"बस महाराज, जिसका सूरज उसके पास। " मंत्री बोला।
"क्या मतलब है तुम्हारा।  साफ साफ बताओ। " राजा ने कड़क कर पूछा।

"तो सुनिए महाराज , आपने पूर्व दिशा को अपना पानी भेजना बंद कर दिया।  इसीलिए वहा के लोगो ने आपकी तरफ अपना सूरज भेजना बंद कर दिया।  हिसाब बराबर।  अब न सूरज इस और आएगा और न ही राज्य में रोशनी होगी। "

यह सुनकर राजा सुन्न रह गया और बोला- "तुम तुरंत जाओ और नदी की दीवार को तुड़वा दो।  पानी को पूर्व की और भेज दो।  वह से सूरज मँगाओ।  जल्दी करो।"

मंत्री दीवार तुड़वाने का आश्वाशन देकर चला जाता है।  सुबह तक दीवार टूट गई थी।  सारा पानी नदी में फिर से बहने लगा था।  नगरवासी खुशिया मना रहे थे और राजा गोवर्धन सूर्य को फिर से पाकर प्रसन्नता से झूम रहा था।









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