पाठको! राजस्थान में लोक वाद्य यंत्रो का बहुतायत में इस्तेमाल किया जाता है तथा यहाँ बहुत से वाद्य यंत्र कलाकार मिलते है साथ ही राजस्थान संस्कृति को बनाये रखने में इनका महत्पूर्ण स्थान है। आगामी परीक्षाओ की तैयारी के क्रम में इस लेख के माध्यम से आपको आपको आसानी होगी। धन्यवाद !
राजस्थान में लोकवाद्यो के प्रसिद्द कलाकार तथा महत्वपूर्ण तथ्य
- रावणहत्था का निर्माण आधे कटे नारियल की कटोरी से होता है।
- पाबूजी की फड़ बाचते समय भोपो द्वारा रावण हत्था वाद्य का प्रयोग किया जाता है।
- देवनारायण जी फड़ बाचते समय गुर्जर भोपे जंतर वाद्य यंत्र का प्रयोग करते है।
- 'मशक' भैरुजी के भोपो का प्रमुख वाद्य है।
- 'मांदल' शिव पार्वती (गौरी) का वाद्य है।
- पंडित विश्व मोहन भट्ट "मोहन वीणा" के अविष्कारक है।
- नागफणी सुषिर वाद्य है। शहनाई वाद्य सुषिर वाद्यों में सर्वश्रेष्ठ और सुरीला वाद्य माना गया है जो शास्त्रीय वाद्य है।
- पूंगी सांपो को पकड़ने हेतु कालबेलियों द्वारा बजाई जाती है।
- अलगोजा राजस्थान का राज्य वाद्य है।
- अलगोजा आदिवासियों का लोकप्रिय वाद्य है।
- तत वाद्य में सारंगी सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है और जैसलमेर और बाड़मेर के लंगा जाति के लोग इसका मुख्य प्रयोग करते है।
- कामायचा का प्रयोग जैसलमेर और बाड़मेर के मुस्लिम शेख अर्थात मांगणियार करते है। जयपुर के प्रसिद्द कलाकार रामनाथ चौधरी नक्से अलगोजा बजाते है।
- कामड़ जाति के लोग तेरहताली नृत्य के साथ मंजीरा और तन्दुरा बजाते है।
- मांदल आदिवासी भीलो और गरासियों का प्रमुख वाद्य है।
- नाथद्वारा (राजसमंद) के पंडित पुरुषोत्तम दस राजस्थान के प्रमुख पखावज वादक है।
- अलवर के जहूर खा मेवाती भपंग के जादूगर माने जाते है।
- झापली कला (बाड़मेर) के सद्दीक खा मांगणियार खड़ताल के जादूगर है।
- जैसलमेर के करणा भील प्रसिद्द नड़ वादक थे। हमीरा (जैसलमेर) के साकर खा मांगणियार (मरुधरा का संगीत कमल ) परंपरागत लोकवाद्य कामायचा के सर्वश्रेष्ठ वादक मने जाते है।
- हमीरा (जैसलमेर ) के पेपे खा प्रसिद्द सुरनाई वादक है, इन्होने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सुरनाई वादन में ख्याति अर्जित की है।
- सीकर में जन्मे उस्ताद सुल्तान खा और उदयपुर के पंडित रामनारायण सारंगी वादक है।
- चूरू के भवानी शंकर कत्थक पखावज के जादूगर है। कथौड़ी जाति के लोग लोकनृत्य में तारपी, टापरा, पावरी, थालीसर, घोरिया, और बंसली आदि वाद्य बजाते है।
- पंडित विश्व मोहन भट्ट (जयपुर) ो संगीत के प्रसिद्द ग्रैमी अवार्ड से 1991 में नवाजा गया।
- केला देवी के मेले में नगाड़े, ताशे, तीनतारा मुख्य वाद्य बजते है।
- तारपी - यह लौकी से बना वाद्य है, जिसके निचले सिरे पर भैस का सींग लगा होता है।
- टापरा - बांस से बना वाद्य।
- पावरी - बांस से बना वाद्य, जिसमे 16 छिद्र होते है।
- घोरिया- इसे खोखरा भी कहते है, इसे बांस से बनाया जाता है।
- लक्ष्मणगढ़ के मीणा क्षेत्र में पुंगी सर्वाधिक बजाई जाती है। भीलवाड़ा में भीलो द्वारा देशी मशक बनाई जाती है। भीलो में ढूचको तथा भपंग वाद्य प्रचलित है।
- सितार के प्रसिद्द कलाकार रवि शंकर जी तथा विलायत खा है।
- बांसुरी के प्रसिद्द कलाकार पन्नालाल घोष तथा हरिप्रसाद चौरसिया है। कामायचा के प्रसिद्द वाद्य कलाकार कमल साकार खा है।
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