प्रायश्चित
प्राचीन समय की बात है एक राजा था। उनकी एक पुत्री थी जिसका नाम चित्रा था। वह बहुत सुन्दर, सौम्य और सरल स्वाभाव की थी। राजा की एक दासी थी तथा संयोगवश दासी की पुत्री भी चित्रा की ही उम्र की थी। राजकुमारी के साथ दासी की पुत्री भी खेलती रहती थी। चित्रा भी दासी पुत्री के प्रति स्नेह भाव रखती थी।
एक दिन राजकुमारी अपनी सहेलियों के साथ जंगल में घूमने निकली। जब वे लोग जंगल में खेल रहे थे तो बारिश शुरू हो गई। राजकुमारी ने आस पास छुपने के लिए जगह देखि तो उसे एक गुफा दिखाई दी।
राजकुमारी ने जो ही गुफा में पैर रखा वैसे ही गुफा बंद हो गई। राजकुमारी की सहेलिया घबरा गई और तुरंत वह से चली गई और तुरंत महल में लौटकर इसकी सुचना राजा को दी।
अपने सैनिको को लेकर तुरंत राजा गुफा के नजदीक आ गए और उस गुफा को तोड़ने का प्रयास करने लगे परन्तु उन्हें सफलता नहीं मिली। ईश्वर का अभिशाप मानकर राजा वापस लौट पड़े।
उधर जब राजकुमारी गुफा में बंद हो गई तो उसके आश्चर्य की कोई सीमा न रही। उसने देखा की गुफा के अंदर तरह तरह के पेड़ पोधो फलो तथा फूलो से लदे है। आगे बढ़ने पर राजकुमारी ने देखा की एक राजकुमार के समान युवक एक पेड़ के नीचे बेहोश पड़ा था। राजकुमारी ने अपने आँचल से उस राजकुमार के हाथ मुँह साफ किये तथा उसे फलो का रस पिलाने लगी।
इस प्रकार कई वर्ष बीत गए , एक दिन दासी पुत्री ने सोचा की राजकुमारी को ढूंढा जाये और वह गुफा के पास आ गई। गुफा के पास आकर उसे बहुत सारे पत्थर दिखे , उसने उन पत्थरो को एक एक करके हटाना शुरू कर दिया। अचानक ही किसी एक पत्थर पर दासी का हाथ पड़ा और वह गुफा खुल गई। उसने अंदर जाकर देखा की राजकुमारी उस राजकुमार की सेवा में व्यस्त है।
राजकुमारी उसे देखते ही उसके गले लग गई तथा उसने दासी की पुत्री को सारी बाते बता दी की उसने कैसे उस मूर्छित युवक की सेवा की।
जब वह दोनों बाते कर रही थी तभी अचानक उस राजकुमार की आँखे खुल गई। अब दासी की बेटी के मन में कपट आ गया। वह भागकर उस युवक की और गई और बोली, "मै पिछले कई वर्षो से आपकी सेवा कर रही हु। "
उस युवक ने राजकुमारी के बारे में पूछा तो दासी की पुत्री ने राजकुमारी को नौकरानी बताया, क्योकि राजकुमारी काफी कमजोर हो चली थी तथा वह फटे पुराने कपड़ो में भी थी अतः युवक को शक भी नहीं हुआ और उसने राजकुमारी को नौकरानी समझ लिया। उस युवक ने बताया वह वास्तव में एक देश का राजकुमार है, एक युद्ध में उसके पिता मारे गए तथा वह भी काफी घायल हो गया था इसलिए उसके सैनिको ने उसे यहाँ सुरक्षित पंहुचा दिया था। जब उसे लगा की उसका अंतिम समय आ गया है तो वह एक बूढ़ा बाबा खड़ा था उसने बोला की "राजकुमार तुम्हारा अंतिम समय आ गया है परन्तु पिछले जनम में तुमने मेरी बहुत सेवा की है अतः मेरा आशीर्वाद है की यदि कोई राजकुमारी तुम्हारी मन से सेवा करेगी तो तुम उसके कुछ समय बाद ठीक हो जाओगे तथा पुनः राज्य प्राप्त करोगे।"
कुछ समय बाद राजकुमार ने अपनी सेना बनाई तथा अपने बल तथा पराक्रम से शत्रु पर विजय प्राप्त की। राजकुमार ने दासी की बेटी जिसे वह राजकुमारी समझता था से कहा की वह शीघ ही उससे विवाह करेगा।
एक बार राजकुमार किसी राजा के निमंत्रण पर दूसरे देश को रवाना हुआ। उसने दासी की बेटी से उसकी जरुरत पूछी। दासी की बेटी ने सोने चांदी के आभूषणों की मांग की। राजकुमार ने राजकुमारी जिसे वह नौकरानी समझता था से भी पूछा की वह उसके लिए क्या लाये तब उसने सिर्फ एक गुड़िया की मांग की।
राजकुमार जब दूसरे राज्य में पंहुचा तो उसने काफी मात्रा में सोना चांदी लिए परन्तु उसे ढूंढ़ने पर भी गुड़िया नहीं मिली। राजकुमार जिस राजा का मेहमान था उसे उसने सारी बाते बताई। उस राजकुमार की बात सुनकर वहा की रानी खूब रोईं और बोली की उसकी पुत्री को भी गुड़िया से बहुत प्यार था साथ ही गुफा की सभी बात उसने राजकुमार से साझा की।
ये सुनने के बाद राजकुमार समझ गया की असली राजकुमारी कौन है ?
राजकुमार ने राजा रानी को अपने राज्य में आने का निमंत्रण दिया। जब राजा रानी वहा पहुंचे तो उन्होंने राजकुमारी को पहचान लिया तथा उसे गले लगा लिया। राजकुमार ने भी अनजाने में हुई गलती के लिए राजकुमारी से माफ़ी मांगी तथा राजकुमारी से विवाह का प्रस्ताव रखा।
राजा ने उन दोनों का विवाह धूमधाम से किया। दासी की बेटी को अपनी गलती पर बड़ा दुःख हुआ। उसने राजकुमारी से कहा की वह नौकरानी बनकर अपने पापो का प्रायश्चित करना चाहती है।
राजकुमारी ने कहा, 'तुम्हे अपनी गलती का एहसास हो चूका है, यही तुम्हारा प्रायश्चित है। तुम मेरे पास ही रहोगी पर नौकरानी के रूप में नहीं, मेरी सहेली बनकर.'
दासी की बेटी के आँखों से टपटप आंसू गिरने लगे।
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