महाराणा प्रताप



महाराणा प्रताप 



  • उदयसिंह के पुत्र महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 ईस्वी में कुम्भलगढ़ के कटारगढ़ में हुआ था। 
  • महाराणा प्रताप को पहाड़ी भागो में "कीका" कहा जाता था।  
  • महाराणा प्रताप की माता का नाम जयंताबाई था जो पाली के अखैराज सोनगरा चौहान की पुत्री थी।  
  • महाराणा प्रताप ने भीलो के सरदार पुंजा को मेवाड़ का सम्पूर्ण भार सौपा, क्योकि वह पर्वतीय प्रदेश का अच्छा जानकर था। 
  • इनका राज्याभिषेक 28 फरवरी 1572 को गोगुन्दा में हुआ। उस समय प्रताप की आयु 32 वर्ष थी, राज्याभिषेक समारोह कुम्भलगढ़ में हुआ जिसमे जोधपुर के राठौड़ राव चन्द्रसेन उपस्थित थे।  
  • महाराणा प्रताप कुम्भलगढ़ से मेवाड़ का शासन करने लगा था।  
  • मुग़ल सम्राट अकबर ने प्रताप को समझने के लिए सबसे पहले जलाल खा को भेजा उसके बाद मान सिंह, भगवंतदास और टोडरमल को भेजा।  
  • 18 जून 1576 टॉड ने हल्दीघाटी के युद्ध को मेवाड़ की थर्मोपॉली, अबुल फजल ने खमनौर का युद्ध तथा बदांयूनी ने गोगुन्दा का युद्ध कहा है।  हल्दीघाटी (पीलीमिट्टी होने के कारण) राजसमंद जिले में है।  
  • हल्दीघाटी के युद्ध में प्रताप के साथ ग्वालियर के रामसिंह तथा पुत्र शालिवाहन भामाशाह तथा उसका भाई ताराचंद, झाला मानसिंह, झाला बीड़ा, सोनगरा मानसिंह प्रमुख व्यक्ति थे। 
  • अकबर की सेना के सेनापति आमेर के कुंवर मानसिंघ थे तथा अग्रिम सेना का सञ्चालन आसफ बान तथा जगन्नाथ कछवाह कर रहे थे।  
  • कुम्भलगढ़ का युद्ध- मुग़ल सेना ने 1578-1580 के मध्य कुम्भलगढ़ पर 4 बार आक्रमण किया।  इनमे से 3 बार शाहनवाज के नेतृत्व में तथा चौथी बार अब्दुल रहीम खानखाना के नेतृत्व में सेना भेजी।  
  • मेवाड़ की भूमि को मुक्त करने का अभियान महाराणा प्रताप ने दिवेर से प्रारम्भ किया।  
  • चांवड- प्रताप द्वारा स्थापित नई राजधानी।  जहा से प्रताप ने 12 वर्ष तथा उनके उत्तराधिकारी अमरसिंह ने 16 वर्ष शासन किया।  
  • भामाशाह- ओसवाल परिवार से सम्बंधित चूलिया ग्राम में महाराणा प्रताप को धन भेजकर सहायता प्रदान की।  प्रताप ने महासाहनी रामा के स्थान पर भामाशाह को अपना प्रधान बनाया था। 
  • भामाशाह को मेवाड़ का उदद्धृक/रक्षक तथा दानवीर कहा जाता है।   
  • महाराणा प्रताप की मृत्यु धनुष की प्रत्यंचा टूटने से घायल होने से हुई थी।  
  • महाराणा जगतसिंघ प्रथम बहुत बड़ा दानवीर था, जिसने विष्णु का पंचायतन मंदिर बनवाया तथा रूपसागर तालाब, मोहन मंदिर तथा जगमंदिर का निर्माण कराया।  
  • धाय का मंदिर (उदयपुर) जगत सिंह प्रथम की धाय नोजूबाई ने बनवाया।  
  • जगत सिंह द्वितीय के समय मेवाड़ में पहली बार मराठाओ ने प्रवेश किया।  
  • कोल्यारी गांव- महाराणा प्रताप हल्दीघाटी युद्ध में घायल होने पर इसी गांव में इलाज करवाया।  
  • हल्दीघाटी युद्ध में प्रताप के घायल होने पर झाला बीदा ने राजकीय छत्र धारण किया और युद्ध करने लगे।
  • बदांयूनी स्वयं युद्ध क्षेत्र में मुगलो की और से लड़ने के लिए उपस्थित था।  
  • बलीचा गांव - प्रताप तथा उसका भाई शक्तिसिंह का मिलन स्थल तथा प्रताप के घोड़े चेतक की मृत्यु यही हुई थी।  
  • 1582 में प्रताप ने गोगुन्दा की जगह चावंड को ही राजधानी बना लिया।  
  • राजा प्रताप ने 1582 में दिवेर के युद्ध में अकबर के प्रतिनिधि सुल्तान खा को मारकर वीरता का प्रदर्शन किया।  
  • कर्नल जेम्स टॉड ने दिवेर के युद्ध को "मेवाड़ का मेराथन" कहा।  
  • प्रताप ने अपने जीवन कल में चित्तौरगढ़ और मांडलगढ़ के अतिरिक्त मेवाड़ के अधिकांश भाग पर पुनः अधिकार कर लिया था।  
  • अकबर ने जगन्नाथ कछवाह को अंतिम बार प्रताप के विरुद्ध भेजा था।  
  • 19 जनवरी 15987 को चावंड में प्रताप की मृत्यु हो गई।  बंदोली गांव में इनका अंतिम संस्कार हुआ। 
  • नसरुदीन (नसीरदी ) प्रताप के दरबार में चित्रकार था।  
  • प्रताप की मृत्यु के बाद उसका पुत्र अमरसिंह मेवाड़ की गद्दी पर बैठा।  
  • महाराणा अमरसिंह ने जहांगीर के प्रतिनिधि पुत्र खुर्रम(शाहजहाँ) के पास संधि का प्रस्ताव भेजा, जिसे जहांगीर ने स्वीकार कर लिया। 
  • अमर सिंह प्रथम मुगलो से संधि करने वाला प्रथम मेवाड़ शासक था।  
  • महाराणा कर्ण सिंह के समय शहजादा खुर्रम (शाहजहाँ) जहांगीर से विद्रोह कर महाराणा के पास आया था और जगमहल में आश्रय दिया।  






















SHARE
    Blogger Comment
    Facebook Comment

0 comments:

Post a Comment