दीर्घ पोषक पदार्थ मानव शरीर में केवल तीन तरह के होते है। कार्बोहाइड्रेट , प्रोटीन तथा वसा।
पौधे अपना भोजन स्वयं बनाते है ायतः इन्हे स्वयं पोषी (Autotropic) कहा जाता है।
प्रकाश संश्लेषक वे जीव होते है जो अपना भोजन बनाने में सौर ऊर्जा काम में लेते है उदाहरण- हरे पादप।
परापोषी (Heterotrophs) वे होते है जो वातावरण से बने बनाये कार्बनिक पोषक पदार्थो को आहार के रूप में लेते है। अधिकांशतः जंतु परापोषी होते है।
भोजन की किस्म के आधार पर जंतुओं को तीन प्रमुख श्रेणियों में रखते है जैसे- शाकाहारी , मांसाहारी, तथा सर्वाहारी।
शाकाहारी जो भोजन का स्रोत वनस्पति हो।
मांसाहारी जिसमे भोजन का स्रोत अन्य जीव हो।
सर्वाहारी जिसमे भोजन का स्रोत पादप तथा जंतु हो।
मनुष्य सर्वाहारी जंतु है।
शशक शाकाहारी पूर्ण भोजी होता है लेकिन अपने भोजन को कुतर कुतर के खाता है।
मानव में जीभ का अग्र भाग मीठे का अनुभव करता है।
जीभ का पश्च भाग कड़ुए का अनुभव करता है।
जीभा के दोनों किनारे खट्टे का अनुभव करते है।
मानव मुख में चार प्रकार के दांत होते है
छेदक (Incisors)- यह भोजन को टुकड़ो में कुतरने का कार्य करते है।
रदनक - ये भोजन को चीरने फाड़ने का कार्य करते है ये पप्राय मांसभक्षी में होते है
प्रचर्वणक (premolars)- ये भोजन को पीसने का कार्य करते है।
चर्वणक (molars)- ये भी भोजन को पीसने का कार्य करते है।
हाथियों में 2 लम्बे हांथी दांत छेदक (incisors) ही होते है।
मानव में दूधिया दांत 20 होते है
स्थाई दांत 12 होते है जो केवल एक बार निकलते है। इनमे से तीसरे चर्वणक सबसे अंत में निकलते है। इन्ही को ही अकल दाढ़ कहते है।
व्यस्क मानव में कुल 32 दांत होते है। बच्चो में कुल 20 दांत होते है।
सूअर तथा घोड़ो में सबसे ज्यादा दांत होते है।
दांतो का इनेमल शरीर का सबसे ज्यादा कठोरतम भाग होते है।
जन्तुओ में सबलिंगुअल ग्रंथि सबसे छोटी तथा पैरोटिड ग्रंथि सबसे बड़ी होती है।
मानव शरीर में सेलुलोस का पाचन नहीं होता है। अन्य जन्तुओ में सेलुलोज का पाचन सीकम में कुछ विशेष जीवाणुओं द्वारा होता है।
दूध को दही में बदलने वाला एंजाइम रेनिन मानव शरीर में संभवतः कभी नहीं होता है।
कब्ज/मलबन्ध (Constipation)- बड़ी आंत में काइम के पीछे सरक जाने की दर कम हो जाने से इसमें सूखे तथा कड़े मल का संचय हो जाता है। इसी को कब्ज कहते है। समय से मल त्याग न करने की बुरी आदत से प्राय ऐसा देखने को मिलता है।
छोटी आंत 2.75 मीटर तथा बड़ी आंत 1.25 मीटर लम्बी होती है।
वसा का पाचन छोटी आंत में होता है।
HCI का स्रवण Oxyntic cell करती है।
1 ग्राम प्रोटीन से 4.1 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है।
लसिका निर्माण का एक प्रमुख केंद्र यकृत भी है।
अग्नाशय मानव शरीर की दूसरी सबसे बड़ी ग्रंथि है। वासा का इमल्सीकरण पित्त द्वारा होता है।
मेंढक पानी नहीं पीता, बल्कि वह अपनी त्वचा द्वारा पानी का अवशोषण करता है।
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