पाठको! राजस्थान जी के अंतर्गत इस लेख में माध्यम से राजस्थान के गुहिल सिसोदिया वंश का वर्णन किया गया है ताकि आगामी परीक्षा दृश्टिकोण से तैयारी में आपको आसानी हो सके। धन्यवाद !
गुहिल सिसोदिया वंश (मेवाड़) / मेवाड़ का गुहिल सिसोदिया वंश
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| गुहिल सिसोदिया वंश |
गुहिल सिसोदिया वंश का राजस्थान जी के में महत्पूर्ण स्थान है इससे मेवाड़ राजवंश के बारे में जानने को भी मिलता है। मेवाड़ राजवंश की स्थापना 500 ईस्वी में गुहिल नामक एक प्रतापी राजा ने की थी। ऐतिहासिक साक्ष्य के अनुसार 566 ईस्वी के आसपास यह वंश स्थापित माना गया है। नागदा इसकी प्राचीन राजधांनी थी। भारत की आजादी के समय मेवाड़ घराना विश्व का सबसे पुराना राजवंश था।
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- गौरी शंकर हीरा शंकर ओझा ने गुहिल वंशीय राजपूतो को विशुद्ध सूर्यवंशीय क्षत्रिय माना है जबकि डॉक्टर डी आर भंडारकर ने ब्राह्मण माना है।
- गुहिल के समय बापा रावल का नाम उल्लेखनीय है जिसने सर्वप्रथम सोने के सिक्के का प्रचलन आरम्भ किया, इसका वास्तविक नाम कलाभोज था। हारीत ऋषि की कृपा से वह शासक बना था।
- आहड से पूर्व गुहिल वंश की गतिविधियों का केंद्र नागदा था।
- मेवाड़ के राजाओ को हिन्दुओं का सूरज कहा जाता है। राणा रतन सिंह गुहिल वंश का अंतिम शासक था। 1302 ईस्वी में अलाउदीन खिलजी ने राणा रतनसिंह के समय चित्तोड़ पर आक्रमण किया।
- अलाउदीन के आक्रमण के समय रतनसिंह और गौरा और बादल वीर गति को प्राप्त हुए।
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- रानी पद्मिनी ने 1600 स्त्रियों के साथ जौहर कर लिया। यह चित्तौडग़ढ़ के प्रथम साका के नाम से प्रसिद्द है। अलाउदीन खिलजी ने चित्तोड़ को जीतकर उसका नाम खिज्राबाद कर दिया था और खिज्र खा को मेवाड़ सौप दिया।
- अलाउदीन के चित्तौरगढ़ पर आक्रमण के समय सुप्रसिद्ध कवि अमर खुसरो भी साथ था।
- अलाउदीन की मृत्यु के बाद सिसोद सरदार लक्ष्मण सिंह के पौत्र हमीर ने मेवाड़ में सिसोदिया वंश की स्थापना की।
- हम्मीर ने बनबीर को हराकर चित्तोड़ में सिसोदिया वंश की नीव रखी। इसने चित्तोड़ में अन्नपूर्णा मंदिर का निर्माण करवाया। हम्मीर को रसिकप्रिया में वीर राजा तथा कीर्ति स्तम्भ में विषमघाटी पंचानन की संज्ञा दी।
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- महाराणा लाखा के समय जावर में चांदी की खान निकल आई। एक बंजारे ने पिछोला झील का निर्माण करवाया।
- राणा लाखा का विवाह मारवाड़ नरेश राव चूंडा की पुत्री तथा रणमल की बहन हंसाबाई के साथ हुआ था।
- लाखा के बड़े पुत्र चूंडा ने मेवाड़ सिंहासन पर अपने अधिकार त्याग कर हंसाबाई के पुत्र मोकल को सिंहासन पर बैठाया। इसलिए चूंडा को राजस्थान का भीष्म पितामह कहते है। मोकल की हत्या उसके दो चाचाओं चाचा और मेरा ने की थी।

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